लखनऊ, 2 अप्रैल 2025, बुधवार। राजधानी लखनऊ में बख्शी का तालाब (बीकेटी) के इटौंजा थाना क्षेत्र में गोमती नदी की जमीन पर बना नीलांश वाटर पार्क एक बार फिर सुर्खियों में है। यह जगह, जो कभी मौज-मस्ती और मनोरंजन का ठिकाना मानी जाती थी, अब अपराध, अय्याशी और गुंडागर्दी का पर्याय बनती जा रही है। ताजा घटना 1 अप्रैल मंगलवार की है, जब नहाने आए कुछ युवकों के साथ पार्क के बाउंसरों ने जमकर मारपीट की। इस घटना ने न सिर्फ प्रबंधन की गुंडई को उजागर किया, बल्कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर दिए।
मौज-मस्ती के लिए गए, पिटाई खाकर लौटे
मोहम्मद हसन (वजीरगंज) और सलमान (लखनऊ) अपने 10 दोस्तों के साथ नीलांश वाटर पार्क में नहाने और दिन बिताने गए थे। लेकिन उनकी यह खुशी उस वक्त दर्द में बदल गई, जब पार्क के बाउंसरों ने उन पर हमला बोल दिया। पीड़ितों का कहना है कि वे ग्राउंड में बैठे थे, तभी बाउंसर एक लड़के और लड़की को साथ ले जा रहे थे। उनके साथियों ने इसका विरोध किया, जो बाउंसरों को नागवार गुजरा। नतीजा? मोहम्मद हसन, मोहम्मद अफजल, सलमान और उनके दोस्तों की बेरहमी से पिटाई शुरू हो गई।
बात यहीं खत्म नहीं हुई। मारपीट का वीडियो बना रहे एक साथी को भी बाउंसरों ने नहीं बख्शा। उसे इतना पीटा गया कि उसकी आंख में गंभीर चोट आई। हालात बेकाबू होते देख पीड़ितों ने 112 और 108 पर कॉल कर मदद मांगी। तब जाकर उनकी जान बची। एक पीड़ित का इलाज इटौंजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। पीड़ितों ने इटौंजा थाने में लिखित शिकायत दी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
विवादों से पुराना नाता
नीलांश वाटर पार्क का नाम विवादों से जोड़ा जाना कोई नई बात नहीं है। गोमती नदी की अधिकांश जमीन पर कब्जा कर बनाया गया यह पार्क पहले भी कई बार चर्चा में रहा है। कभी किसानों की जमीन हड़पने के आरोप, कभी मारपीट, तो कभी लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाएं—यहां की कहानियां अखबारों की सुर्खियां बन चुकी हैं। प्रबंधन और उनके पाले हुए गुंडों की गुंडागर्दी की शिकायतें बार-बार सामने आती हैं, लेकिन हर बार मामला दब जाता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन की मौन स्वीकृति इस अराजकता को बढ़ावा दे रही है?
“अय्याशी का अड्डा” और प्रशासन की चुप्पी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नीलांश वाटर पार्क अय्याशी और नशे का गढ़ बन चुका है। आए दिन होने वाली आपराधिक घटनाओं के बावजूद पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बने रहते हैं। ताजा घटना के बाद भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी की, जिससे पीड़ितों का गुस्सा भड़क गया। न्याय की आस में उन्होंने समाजसेवी दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज से गुहार लगाई। तिरंगा महाराज ने थाने पहुंचकर नीलांश वाटर पार्क को सील करने, प्रबंधन और गुंडों पर मुकदमा दर्ज करने, और उनकी गिरफ्तारी की मांग उठाई।
क्या होगा आगे?
अब सबकी नजरें इटौंजा पुलिस पर टिकी हैं। क्या इस बार सख्त कार्रवाई होगी, या फिर पहले की तरह यह मामला भी लीपापोती की भेंट चढ़ जाएगा? नीलांश वाटर पार्क की यह घटना सिर्फ एक मारपीट की वारदात नहीं, बल्कि एक बड़े सवाल का प्रतीक है—क्या प्रशासन की चुप्पी अपराधियों को खुली छूट दे रही है? अगर ऐसा ही चलता रहा, तो यह पार्क मौज-मस्ती की जगह नहीं, बल्कि डर और दहशत का अड्डा बनकर रह जाएगा। समय बताएगा कि सच क्या है और न्याय का पहिया कितना घूमता है।