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Sunday, April 21, 2024

बरेली: आग की घटना के बाद रेफर किए गए नवजात ने रास्ते में दम तोड़ दिया।

बरेली के महिला जिला अस्पताल की एसएनसीयू में मंगलवार को आग की घटना के बाद रेफर किए गए पांचों नवजात में से एक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं पहुंचते-पहुंचते बाकी चार में से तीन की हालत बिगड़ गई। उनको भी हायर सेंटर रेफर करना पड़ा है। एक नवजात का बदायूं में इलाज चल रहा है।

एमसीएच (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग के प्रथम तल पर स्थित एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में मंगलवार सुबह शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। तेज धमाकों के बीच वार्ड में धुआं भर गया, जिससे भगदड़ मच गई। वार्ड में भर्ती 11 में से पांच नवजातों को एंबुलेंस से बदायूं मेडिकल कॉलेज भेजा गया था।

एमसीएच (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग के प्रथम तल पर स्थित एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में मंगलवार सुबह शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। तेज धमाकों के बीच वार्ड में धुआं भर गया, जिससे भगदड़ मच गई। वार्ड में भर्ती 11 में से पांच नवजातों को एंबुलेंस से बदायूं मेडिकल कॉलेज भेजा गया था।

राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के सीएमएस डॉ. सीपी सिंह के मुताबिक बरेली से पांच नवजात रेफर किए गए थे। इनमें से शबाना के बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। उसकी जुड़वा बहन नजरीन, अहिल व त्रिवेणी को मेडिकल कॉलेज सैफई रेफर किया गया। राधा का उपचार चल रहा है। वहीं, सैफई जाने के बजाय परिजन नजरीन को वापस बरेली ले आए। उसको वहां निजी अस्पताल के एसएनसीयू में रखा गया है।

जिला महिला अस्पताल बरेली के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने बताया कि दो जुड़वां बच्चे निजी अस्पताल से रेफर होकर आए थे। नजरीन का वजन करीब दो किलो और दूसरे का सिर्फ 800 ग्राम था। जब वे आए थे, तभी कहा गया था कि इन्हें वेंटीलेटर की जरूरत है, लेकिन परिजन नहीं माने। यहां उनको एसएनसीयू में रखा गया था। बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। शॉर्ट सर्किट के बाद बच्चों को रेफर करते समय परिजनों को उसे पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव दिया था लेकिन वे उसे बदायूं मेडिकल कॉलेज ले जाना चाहते थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई।

घटना के 12 घंटे बाद देर शाम एडीएम सिटी सौरभ दुबे, सिटी मजिस्ट्रेट रेन सिंह, सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने महिला अस्पताल पहुंचकर घटना के बारे में जानकारी ली। उधर, इमरजेंसी स्टाफ का दावा है कि मंगलवार को सिजेरियन प्रसव की तिथि नहीं थी। सीएमएस ने सिजेरियन वार्ड के लिए विकल्प के तौर पर जेनरेटर लगाने की बात कही है।

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Anita Choudhary is a freelance journalist. Writing articles for many organizations both in Hindi and English on different political and social issues

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