✍️ बृजेन्द्र बी. यादव
वाराणसी, 5 अप्रैल 2025, शनिवार: आज सुबह अम्बेडकर पार्क कचहरी के प्रांगण में एक पत्रकार वार्ता ने पूरे शहर में हलचल मचा दी। इस वार्ता में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने अयोध्या के चर्चित महंत राजूदास के खिलाफ देशद्रोह सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा चलने की घोषणा की। यह मामला तब शुरू हुआ जब महंत राजूदास ने कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज में दिवंगत मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा को निशाना बनाते हुए एक आपत्तिजनक टिप्पणी अपने एक्स हैंडल से रीट्वीट की थी। इस बयान ने न केवल समाजवादी पार्टी के समर्थकों को आहत किया, बल्कि देश भर में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया।
विवाद की शुरुआत: एक ट्वीट ने मचाया बवाल
20 जनवरी 2025 को महंत राजूदास ने अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट रीट्वीट की, जिसमें लिखा था, “अगर आप कुम्भ मेले में जा रहे हैं तो इस कठमुल्ले के ऊपर जरूर मूत के जाए।” यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा के संदर्भ में थी। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया और मुलायम सिंह के चाहने वालों में भारी आक्रोश फैल गया। अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने इसे न केवल व्यक्तिगत अपमान, बल्कि देश की एकता और अखंडता के खिलाफ एक खतरनाक कदम बताया।
कानूनी कार्रवाई: कोर्ट ने जारी किया नोटिस
इस टिप्पणी से आहत होकर प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने 23 जनवरी 2025 को वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्रुतगामी कोर्ट में महंत राजूदास के खिलाफ मुकदमा नंबर 2461/2025 दायर किया। कोर्ट ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए परिवादी प्रेम प्रकाश और साक्षियों डॉ. संजय सोनकर, डॉ. राहुल यादव और एडवोकेट जितेंद्र विश्वकर्मा के बयान दर्ज किए। सुनवाई के बाद, 4 अप्रैल 2025 को न्यायालय ने महंत राजूदास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 (देशद्रोह), 196 (धार्मिक भावनाएं भड़काना), 197 (सार्वजनिक शांति भंग करना), 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 299 (मानहानि), 351 (आपराधिक धमकी), 353 (लोक सेवक को डराना), 356 (फरार अपराधी के खिलाफ कार्रवाई) और आईटी एक्ट के तहत नोटिस जारी किया। महंत को 23 अप्रैल 2025 को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।

क्या है अधिवक्ता का दावा?
पत्रकार वार्ता में प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने कहा, “महंत राजूदास का यह बयान न सिर्फ मुलायम सिंह यादव और उनके समर्थकों का अपमान है, बल्कि यह देश की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कृत्य है। यह विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने की कोशिश है। हम इसे देशद्रोह मानते हैं और इसके लिए सख्त से सख्त सजा की मांग करते हैं।” उन्होंने आगे दावा किया कि इस मामले में महंत राजूदास को जेल भेजा जाएगा और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है।
महंत राजूदास: विवादों से पुराना नाता
अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजूदास पहले भी अपने बयानों और हरकतों के चलते सुर्खियों में रहे हैं। चाहे वह अयोध्या के डीएम से उनकी तीखी बहस हो या स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ किसी कार्यक्रम में हाथापाई का मामला, राजूदास हमेशा चर्चा का केंद्र रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें एक निडर और स्पष्टवादी संत मानते हैं, जबकि आलोचक उनके बयानों को उत्तेजक और समाज के लिए हानिकारक बताते हैं। इस बार, हालांकि, मामला कानूनी दायरे में पहुंच गया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस पर क्या फैसला सुनाती है।
आगे क्या?
23 अप्रैल को होने वाली सुनवाई अब इस मामले का अगला अहम पड़ाव होगी। अगर महंत राजूदास कोर्ट में पेश नहीं होते, तो उनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई हो सकती है। बीएनएस की धारा 356 के तहत, यदि कोई अभियुक्त जानबूझकर कोर्ट से बचता है, तो उसे फरार घोषित कर मुकदमा उसकी अनुपस्थिति में भी चलाया जा सकता है। दूसरी ओर, देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के चलते इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर तूल पकड़ लिया है।
यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं पर भी सवाल उठाता है। क्या महंत राजूदास का बयान महज एक उत्तेजक टिप्पणी था, या यह वाकई देश की एकता के लिए खतरा था? इसका जवाब अब कोर्ट के हाथ में है। तब तक, वाराणसी से लेकर अयोध्या तक, यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहेगा।