N/A
Total Visitor
37.5 C
Delhi
Thursday, April 3, 2025

वक्फ संशोधन विधेयक 2025: संसद में हंगामा, सरकार के 5 भरोसे और एक नई बहस

नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2025, बुधवार। 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, बल्कि आम जनता के बीच भी उत्सुकता का केंद्र बन गया। बुधवार दोपहर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को सदन के पटल पर रखा। प्रश्नकाल के बाद शुरू हुई इस पेशकश के साथ ही संसद में हंगामे का माहौल बन गया। सरकार ने इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया, लेकिन विपक्ष ने इसे नाकाफी बताते हुए 12 घंटे की मांग ठोक दी।

हंगामे के बीच बिल की पेशकश

जैसे ही किरेन रिजिजू ने बिल को पेश किया, विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी और विरोध के बीच सरकार ने अपनी बात रखने की कोशिश की। रिजिजू ने बताया कि इस विधेयक को लेकर अब तक 97,27,772 याचिकाएं मिली हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा, “आज तक किसी भी बिल को लेकर इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं आईं।” इसके अलावा, 284 प्रतिनिधिमंडलों ने विभिन्न समितियों के सामने अपनी बात रखी। रिजिजू ने दावा किया कि जो लोग सकारात्मक सोच के साथ इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे भी समय के साथ इसका समर्थन करेंगे।

सरकार के 5 ‘भरोसे’ क्या हैं?

इस विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय में उठ रहे सवालों और आशंकाओं को शांत करने के लिए सरकार ने पांच बड़े भरोसे दिए। ये वादे न सिर्फ बिल की मंशा को स्पष्ट करते हैं, बल्कि इसे धार्मिक हस्तक्षेप से दूर रखने की कोशिश को भी रेखांकित करते हैं। आइए, इन पर नजर डालें:

  • मस्जिदों पर कोई कार्रवाई नहीं: रिजिजू ने साफ कहा कि इस बिल में किसी मस्जिद पर कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। यह सिर्फ संपत्ति से जुड़ा मामला है, धार्मिक संस्थानों से इसका कोई वास्ता नहीं।
  • धार्मिक स्थलों में हस्तक्षेप नहीं: सरकार ने दोहराया कि वक्फ संशोधन बिल मस्जिदों या किसी धार्मिक स्थल की व्यवस्था में दखल नहीं देगा। न कोई बदलाव, न कोई हस्तक्षेप।
  • धार्मिक गतिविधियों से दूरी: बिल में धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप का कोई इरादा नहीं है। रिजिजू ने कहा, “हम मस्जिदों के संचालन में दखल नहीं देंगे। वक्फ बोर्ड कानून के दायरे में काम करेगा।”
  • विवादित जमीन पर नजर: कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी ही सरकारी या विवादित जमीन के मामले देखेंगे। वक्फ संपत्ति बनाते वक्त आदिवासी क्षेत्रों में दखल नहीं दिया जाएगा। मस्जिदों के प्रबंधन से सरकार का कोई लेना-देना नहीं।
  • संतुलित प्रतिनिधित्व: सेंटर ऑफ काउंसिल में 22 सदस्य होंगे, जिनमें गैर-मुस्लिमों की संख्या 4 से ज्यादा नहीं होगी। संसद के तीन सदस्य भी शामिल होंगे, जो किसी भी धर्म से हो सकते हैं।

एक नई बहस की शुरुआत

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 न सिर्फ संपत्ति प्रबंधन के नियमों को बदलने की कोशिश है, बल्कि यह एक संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का कारण भी बन गया है। सरकार इसे पारदर्शिता और सुधार का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अपर्याप्त समय और संभावित विवादों का हवाला देकर खारिज करने की मांग कर रहा है।

सवाल यह है कि क्या यह बिल वाकई में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाएगा या फिर यह एक नए राजनीतिक तूफान की शुरुआत है? आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इसकी गूंज सुनाई देती रहेगी। तब तक, यह विधेयक चर्चा, बहस और उम्मीदों के बीच अपनी राह तलाश रहा है।

Advertisement

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

2,300FansLike
9,694FollowersFollow
19,500SubscribersSubscribe

Advertisement Section

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_img

Latest Articles

Translate »