प्रयागराज, 5 अप्रैल 2025, शनिवार। प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने आस्था और भक्ति का एक नया इतिहास रच दिया। इस बार 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में पुण्य की डुबकी लगाई। इस अलौकिक अनुभव को हर किसी तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने अनूठा प्रयास किया। अग्नि शमन विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में त्रिवेणी का पावन जल पहुंचाया गया। लेकिन अब यह जल सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विदेशों से भी इसकी मांग बढ़ने लगी है। इसी कड़ी में पहली खेप प्रयागराज से जर्मनी के लिए रवाना हो चुकी है।
विदेशों में गूंजी त्रिवेणी की महिमा
महाकुंभ के समापन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने संगम के जल को महाप्रसाद के रूप में प्रदेश के हर कोने तक पहुंचाने का संकल्प लिया था, ताकि जो श्रद्धालु किसी कारणवश कुंभ में शामिल न हो सके, वे भी इस पुण्य के भागी बन सकें। लेकिन अब यह पवित्र जल देश की सीमाओं को पार कर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है। प्रयागराज के एनआरएलएम उपायुक्त राजीव कुमार सिंह बताते हैं कि जसरा की नारी शक्ति महिला प्रेरणा संकुल स्तरीय समिति ने इस नेक काम को हाथ में लिया है। इसी समिति के प्रयासों से 1000 कांच की बोतलों में त्रिवेणी का गंगा जल जर्मनी भेजा गया। यह जल श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी के माध्यम से विदेश पहुंचाया गया। जर्मनी के उन श्रद्धालुओं के लिए यह जल भेजा गया है, जो महाकुंभ में नहीं आ सके। प्रत्येक बोतल में 250 मिलीलीटर पवित्र जल भरा गया, जो आस्था का प्रतीक बनकर समुद्र पार पहुंचा।
महाराष्ट्र से 50 हजार बोतलों का ऑर्डर
महाकुंभ के दौरान ही प्रयागराज में त्रिवेणी के जल की पैकेजिंग का काम बड़े स्तर पर शुरू हो गया था। यह जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों ने संभाली। जसरा की नारी शक्ति महिला प्रेरणा संकुल की प्रभारी नमिता सिंह बताती हैं कि कुंभ के बाद अब तक उनकी टीम 50 हजार से अधिक बोतलों में गंगा जल पैक कर भेज चुकी है। हाल ही में नागपुर के शिव शंभू ग्रुप सोसायटी ने 50 हजार बोतलों का ऑर्डर दिया, जिसमें 500 मिलीलीटर की बोतलों में यह जल भेजा गया। नमिता गर्व से कहती हैं कि यह काम न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की भी मिसाल बन रहा है।
यूपी से असम तक जल की यात्रा
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में त्रिवेणी का पावन जल अग्नि शमन विभाग के सहयोग से पहले ही पहुंचाया जा चुका है। इस बीच पूर्वोत्तर राज्य असम से भी इस जल की मांग आई। गुवाहाटी के परम शिवम शिव मंदिर योगाश्रम के संत राजा रामदास निजी टैंकर लेकर त्रिवेणी संगम पहुंचे। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) प्रमोद शर्मा बताते हैं कि संत राजा रामदास ने विभाग से सहयोग मांगा, जिसके बाद उनके टैंकरों में गंगा जल भरकर असम के लिए रवाना किया गया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि त्रिवेणी का जल अब देश के हर कोने में आस्था का आधार बन रहा है।
आस्था और आत्मनिर्भरता का संगम
त्रिवेणी के पावन जल की यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर भी पेश करती है। महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पैकेजिंग और आपूर्ति का काम न सिर्फ रोजगार सृजन कर रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जा रहा है। जर्मनी से लेकर महाराष्ट्र और असम तक, यह जल आस्था का संदेश बनकर पहुंच रहा है। प्रयागराज का यह प्रयास साबित करता है कि आस्था और संगठन का यह संगम आने वाले दिनों में और भी ऊंचाइयों को छूएगा।