वाराणसी, 2 अप्रैल 2025, बुधवार। वाराणसी की सड़कों पर बुधवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर की गई अभद्र टिप्पणी और उनके पुतले जलाए जाने की घटना ने सपा समर्थकों को आगबबूला कर दिया। इस विरोध को लेकर सपा नेताओं ने अपर पुलिस आयुक्त राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की और अपना आक्रोश जाहिर किया। सपा नेताओं ने न सिर्फ अखिलेश के खिलाफ की गई टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की, बल्कि अपने साथी संदीप मिश्रा पर कथित तौर पर फर्जी मुकदमा दर्ज किए जाने को भी राजनीतिक साजिश करार दिया।

सपा नेताओं का कहना था कि संदीप मिश्रा के खिलाफ दर्ज मुकदमा पूरी तरह से बेबुनियाद और बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और संदीप के खिलाफ दर्ज केस तत्काल वापस लिया जाए। अपर पुलिस आयुक्त से मुलाकात के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर अपना गुस्सा उतारा।
प्रदर्शन के दौरान शहर दक्षिणी विधानसभा से सपा के पूर्व प्रत्याशी किशन दीक्षित ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “योगी सरकार के मंत्री और विधायक खुलेआम उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का पुतला जला रहे हैं, उनके खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। वहीं, सपा का एक कार्यकर्ता बिना किसी का नाम लिए पोस्टर लगाता है तो उस पर शहर की कानून व्यवस्था बिगाड़ने का इल्जाम लगाकर मुकदमा ठोक दिया जाता है। यह दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

सपा कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन केवल संदीप मिश्रा के समर्थन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अखिलेश यादव के सम्मान और पार्टी की एकजुटता का भी प्रतीक बन गया। प्रदर्शन में एमएलसी आशुतोष सिन्हा, जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़, किशन दीक्षित, संतोष यादव, विष्णु शर्मा, रविकांत विश्वकर्मा, रीबू श्रीवास्तव, पूजा यादव, राहुल गुप्ता जैसे प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे। सपा ने साफ कर दिया कि वह अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ किसी भी अन्याय को सहन नहीं करेगी और इसके खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज उठाती रहेगी।
यह घटना एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा और बीजेपी के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है। अब देखना यह है कि इस प्रदर्शन का असर प्रशासन पर पड़ता है या यह सियासी जंग और तेज होती है।