पीएम मोदी आगामी 25 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेजों का एक साथ उद्घाटन करेंगे। यानि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार देश की 44 योजनाओं के क्रियान्वयन में नंबर वन रही है। जी हां, यूपी सरकार अब मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनेगा, जहां 7 राज्य स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों का एक साथ उद्घाटन किया जाएगा। यह यूपी में चिकित्सा शिक्षा के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर साबित होगा तो वहीं देश में ‘मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ के विकास की दिशा में एक अहम पहल होगी।

मेडिकल क्षेत्र पर क्या होगा असर ?

पीएम मोदी 25 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के 7 नए मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन यूपी के सिद्धार्थनगर जिले से करेंगे। जिनमें ये कॉलेज- सिद्धार्थनगर, देवरिया, एटा, मिर्जापुर, गाजीपुर, हरदोई और बहराइच जिलों में होंगे। ये कॉलेज देश के चिकित्सा संसाधनों के पूल में शामिल होंगे और देश में मेडिकल सीटों की क्षमता बढ़ाने में काम करेंगे। बता दें, इन मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश भी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा, एनईईटी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा।

बढ़ेंगी MBBS की सीटें

इन मेडिकल कॉलेजों के संचालन से उत्तर प्रदेश में MBBS की 700 सीटें बढ़ जाएंगी। इन सभी सात मेडिकल कॉलेजों को MBBS में 100-100 सीटों पर प्रवेश के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद से अनुमति मिल गई है। यानि अब आने वाले वर्षों में राज्य में डॉक्टरों की कमी नहीं खलेगी। इन सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 एमबीबीएस सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया इसी सत्र से शुरू हो जाएगी।

मेडिकल कॉलेजों में मिलेगी ये व्यवस्थाएं

इन मेडिकल कॉलेज में अस्पताल, छात्रावास, स्टाफ आवास की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही साथ फैकल्टी भी पूरी है। सिद्धार्थ नगर मेडिकल कॉलेज से न केवल सिद्धार्थ नगर बल्कि बलरामपुर, महराजगंज और पड़ोसी देश नेपाल तक के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा। ठीक उसी प्रकार बाकी 6 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से आसपास के इलाकों के लोगों को भी चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त होंगी। पीएम मोदी देवरिया, एटा, हरदोई, गाजीपुर, मिर्जापुर के मेडिकल कॉलेजों का भी उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा अगले डेढ़ महीने में गोरखपुर एम्स का उद्घाटन किया जाना है।

कोरोना काल में भारत ने कैसे किया विश्व का नेतृत्व

इन सबसे परे यदि ‘मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ से जुड़ी बात करें तो भारत ने कोविड काल के बाद से इस क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार किया है। जी हां, देश ने आपदा में अवसर की तलाश की और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नवाचार के मार्ग की ओर रुख किया। इसी दौरान भारत ने कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए देसी वैक्सीन तैयार की। वैक्सीन भी केवल एक नहीं बल्कि दो-दो। जी हां, पहले कोविशिल्ड और फिर उसके बाद कोवैक्सीन का निर्माण कर भारत ने अपनी क्षमताओं को विश्व के सामने साबित कर दिया। विश्व के कई देशों ने भारत से कोविड महामारी के दौरान मदद मांगी और भारत ने उनकी जरूरतों को पूरा भी किया। भारत ने जरूरतमंद देशों को वैक्सीन सप्लाई, मेडिकल इक्विपमेंट, मास्क, किट, सेनेटाइजर, काढ़ा जैसे तमाम चीजें उपलब्ध कराई। ”आत्मनिर्भर भारत” राष्ट्रीय मिशन के तहत भारत ने साबित किया कि वैक्सीन निर्माण में वह एक शक्तिशाली राष्ट्र है। इस राष्ट्रीय कोविड वैक्सीन मिशन के माध्यम से ही हमारी वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए किफायती और सुलभ वैक्सीन विकसित की।

भारत के मेडिकल क्षेत्र की क्या रही उपलब्धि

मुश्किल घड़ी के वक्त भारत ने न केवल अपने देश के लोगों को सस्ती और बेहतरीन वैक्सीन उपलब्ध कराई बल्कि विश्व के जरूरतमंद देशों के लिए भी मदद का हाथ बढ़ाया और उन्हें वैक्सीन प्रदान की। देश के भीतर केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर, 2021 तक 101.7 करोड़ से अधिक (1,01,78,96,755) खुराकें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उपलब्ध कराई। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी भी कोविड-19 टीके की 10.42 करोड़ से अधिक ( 10,42,45,455) अतिरिक्त और बिना इस्तेमाल हुई खुराकें उपलब्धड हैं, जिन्हें लगाया जाना शेष है। वहीं वैक्सीनेशन के क्षेत्र में भारत नया कीर्तिमान स्थापित करने के बेहद करीब है। जी हां, भारत जल्द ही वैक्सीनेशन का 100 करोड़ का आकंड़ा पार कर जाएगा। बता दें, अब तक देश में 97 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी चुकी है।

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