एम्स में नई अत्याधुनिक डिजिटल पेट (पाजिट्रान एमिशन टोमोग्राफी)-सीटी स्कैन मशीन लगेगी। यह मशीन खरीदने के लिए एम्स ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। यदि सब कुछ योजना के अनुरूप हुआ तो अक्टूबर तक एम्स में यह मशीन लग जाएगी
इससे एम्स में पेट सीटी स्कैन की जांच क्षमता डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। वैसे तो न्यूरो व हृदय रोग के मरीजों की जांच में भी यह तकनीक इस्तेमाल होती है लेकिन नई मशीन आने से कैंसर मरीजों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।
वर्ष भर में पहुंचते हैं एक लाख 75 हजार मरीज
एम्स के कैंसर सेंटर की ओपीडी में वर्ष भर में करीब एक लाख 75 हजार मरीज पहुंचते हैं। जिसमें से करीब 14,500 नए मरीज व बाकी पुराने मरीज शामिल होते हैं। फिर भी मौजूदा समय में एम्स के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में दो पेट-सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध। जिससे प्रतिदिन 60 मरीजों की जांच करने की क्षमता है।
बताया गया कि एक मशीन अपनी उम्र पूरी कर चुकी है और वह 14 वर्ष पुरानी हो चुकी है। दूसरी मशीन भी करीब दस वर्ष पुरानी हो गई है। पहली मशीन अधिक पुरानी होने के कारण उसमें खराबी की समस्या अधिक रहती है। एम्स में कैंसर मरीजों का दबाव अधिक है। ऐसे में पेट सीटी स्कैन जांच के लिए करीब दो माह तक की वेटिंग है। एम्स में हर वर्ष 8500-9000 मरीजों की पेट सीटी स्कैन जांच हो पाती है।
इसके अलावा बहुत मरीज निजी लैब में महंगा शुल्क भुगतान कर जांच कराने को मजबूर होते हैं। निजी डायग्नोस्टिक लैब में पूरे शरीर की पेट सीटी स्कैन जांच का शुल्क 18,000 से 24,000 रुपये है। कैंसर के मरीजों को हर तीन से छह माह पर यह जांच करानी पड़ती है। इस वजह से हर मरीज के लिए निजी लैब के जांच शुल्क का खर्च उठा पाना संभव नहीं होता। दूसरी ओर सरकारी क्षेत्र के अस्पतालों में इस सुविधाओं का अभाव है।