वाराणसी, 2 अप्रैल 2025, बुधवार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत एक बार फिर वाराणसी की पावन धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। 3 मार्च को शुरू होने वाला उनका तीन दिवसीय दौरा न केवल संगठन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूर्वांचल में संघ की जड़ों को और गहरा करने का भी एक सुनहरा अवसर लेकर आ रहा है। हर साल की तरह इस बार भी भागवत का काशी प्रवास उत्साह और तैयारी के साथ स्वागत के लिए तैयार है।
वाराणसी में भव्य स्वागत की तैयारी
3 अप्रैल की शाम करीब 4:30 बजे मोहन भागवत इंडिगो की उड़ान से दिल्ली से वाराणसी पहुंचेंगे। लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनकी सुरक्षा के लिए पहले ही एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग की जा चुकी है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि उनके आगमन को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं। वाराणसी पहुंचते ही वह संगठन के पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक करेंगे, जिसमें संघ की रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होगी। इसके साथ ही वह पूर्वांचल के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन के लिए भी जाएंगे।
काशी प्रवास का केंद्र: निवेदिता शिक्षा सदन
इस दौरे के दौरान मोहन भागवत महमूरगंज स्थित निवेदिता शिक्षा सदन में रुकेंगे। यहां वह न केवल स्वयंसेवकों से संवाद करेंगे, बल्कि कुछ प्रबुद्धजनों से मुलाकात कर विचार-विमर्श भी करेंगे। शाखा में उनकी मौजूदगी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगी। यह दौरा संगठन के नए स्वयंसेवकों को जोड़ने और मौजूदा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आगे की यात्रा और शताब्दी वर्ष की तैयारी
काशी प्रवास के बाद मोहन भागवत 7 अप्रैल को लखनऊ के लिए रवाना होंगे, जहां वह 7 और 8 अप्रैल को विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वह कानपुर का दौरा करेंगे। खास बात यह है कि 30 अप्रैल को वह एक बार फिर काशी लौटेंगे, जहां सामूहिक विवाह कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी होगी। इस बीच, संघ प्रमुख का पूरा ध्यान शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर भी रहेगा। इस साल विजयदशमी पर संघ के 100 साल पूरे हो रहे हैं, जिसके लिए नवरात्र से ही उत्सव की शुरुआत होगी। अक्टूबर से शुरू होने वाले इन आयोजनों को भव्य रूप देने की योजना पर चर्चा भी इस दौरे का हिस्सा होगी।
संगठन और भाजपा में हलचल
मोहन भागवत के आगमन से पहले वाराणसी में संघ के पदाधिकारी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बड़े नेता सक्रिय हो गए हैं। दोनों संगठनों के बीच समन्वय और सहयोग इस दौरे को और खास बनाता है। बीते साल नवंबर 2024 में मथुरा दौरे के दौरान भागवत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी, और इस बार भी उनके काशी प्रवास को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
एक प्रेरक व्यक्तित्व का प्रभाव
मोहन भागवत का यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह संघ के स्वयंसेवकों के लिए एक प्रेरणा और संगठन के लिए एक नई ऊर्जा का संचार करने वाला अवसर है। काशी की आध्यात्मिक भूमि से लेकर पूर्वांचल के कोने-कोने तक, उनका यह प्रवास संघ के मिशन को नई गति देगा। शताब्दी वर्ष के स्वागत के साथ ही यह दौरा आने वाले समय में संघ की दिशा और दशा को भी तय करेगा।