वाराणसी, 5 अप्रैल 2025, शनिवार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का काशी दौरा एक बार फिर सुर्खियों में है। शनिवार की सुबह वे बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में पहुंचे, जहां मंत्रोच्चार की गूंज के बीच 15 मिनट तक विधि-विधान से दर्शन, पूजन और अभिषेक किया। यह पल न केवल आध्यात्मिक था, बल्कि संघ की उस विचारधारा का प्रतीक भी था, जो भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। मंदिर न्यास के पदाधिकारियों के साथ उन्होंने बाबा धाम की भव्यता को निहारा और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। काशी की पावन धरती पर यह दौरा उनके संदेश को और गहराई देता नजर आया।
बाबा के दरबार से प्रबुद्धजनों तक
शनिवार को मोहन भागवत का दिन व्यस्त रहने वाला है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद वे काशी के प्रबुद्धजनों से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में संघ के विस्तार और उसके लक्ष्यों पर चर्चा होगी। काशी, जो हिंदू संस्कृति का प्राचीन केंद्र है, वहां संघ प्रमुख की यह मौजूदगी एक संकेत है कि हिंदुत्व की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान और तेज होगा। यह मुलाकात न केवल विचार-मंथन का मंच होगी, बल्कि समाज को एकजुट करने की दिशा में एक और कदम भी साबित होगी।
IIT BHU में हिंदुत्व का पाठ
इससे पहले, शुक्रवार शाम को मोहन भागवत ने IIT BHU के छात्रों के सामने हिंदुत्व का एक प्रेरक पाठ पढ़ाया। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “हिंदू समाज के सभी पंथ, जाति और समुदाय एक साथ आएं। श्मशान, मंदिर और पानी—ये सब हिंदुओं के लिए एक होने चाहिए।” उनका यह संदेश स्पष्ट था—हिंदू समाज में बंटवारा नहीं, बल्कि एकता होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का लक्ष्य यही है कि समाज का हर वर्ग एक सूत्र में बंधे और आपसी भेदभाव मिट जाए।
संघ का विजन: एकता और संस्कृति की रक्षा
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में संघ के मूल उद्देश्य को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “संघ का मतलब है सबकी मदद करना और युवा शक्ति को सही दिशा देना। हिंदू समुदाय को मजबूत करना और हिंदुत्व की विचारधारा को फैलाना हमारा ध्येय है।” वे भारतीय संस्कृति और उसके सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित करने की बात पर भी अडिग दिखे। “हमारी भाषा, संस्कृति और संस्कार हमारी पहचान हैं। इन्हें बचाने की पहल हमें खुद से करनी होगी,” यह कहते हुए उन्होंने युवाओं को इस दिशा में सक्रिय होने का आह्वान किया।
हिंदुत्व का संदेश: एकता में शक्ति
मोहन भागवत का यह काशी दौरा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक संदेश है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन से लेकर छात्रों और प्रबुद्धजनों के साथ संवाद तक, उनका हर कदम हिंदुत्व की उस परिकल्पना को मजबूत करता है, जिसमें समाज का हर व्यक्ति एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। उनका कहना है कि हिंदुत्व कोई संकीर्ण विचारधारा नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवन दर्शन है जो सभी को साथ लेकर चलता है।
काशी से निकला संदेश
काशी विश्वनाथ की नगरी से मोहन भागवत का यह संदेश दूर तक गूंजेगा। यह दौरा न केवल संघ के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक निमंत्रण है जो भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व के मूल्यों को जीवित रखना चाहता है। श्मशान, मंदिर और पानी को एक करने की उनकी बात समाज में समरसता का सपना बुनती है। अब देखना यह है कि काशी की इस यात्रा से शुरू हुई यह चेतना देश के कोने-कोने तक कैसे पहुंचती है।