मेरठ, 27 मार्च 2025, गुरुवार: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में उस समय हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने आर्मी के कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (सीडीए) ऑफिस पर अचानक छापेमारी की। यह घटना शाम को तब शुरू हुई, जब ऑफिस अपने नियमित समय पर बंद होने की तैयारी में था। दो गाड़ियों में सवार सीबीआई की टीम ने ऑफिस के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही सभी को चौंका दिया। गेट पर तैनात कर्मचारियों के मुताबिक, उस समय ऑफिस में केवल वही स्टाफ मौजूद था, जो दिन के अंत में बंद करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ था। लेकिन सीबीआई की इस अप्रत्याशित एंट्री ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
देर रात तक चली छापेमारी
सीबीआई की टीम ने ऑफिस में प्रवेश करते ही दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी देर रात तक जारी रही, जिसमें टीम ने फाइलों, रिकॉर्ड्स और अन्य महत्वपूर्ण कागजातों को बारीकी से खंगाला। ऑफिस के भीतर मौजूद कर्मचारियों को भी आश्चर्य हुआ कि आखिर यह कार्रवाई किस मामले को लेकर हो रही है। हालांकि, सीबीआई ने अपनी चिरपरिचित गोपनीयता को बरकरार रखते हुए इस ऑपरेशन के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की। टीम ने मीडिया से भी दूरी बनाए रखी और किसी भी सवाल का जवाब देने से परहेज किया।
क्या है सीडीए ऑफिस?
मेरठ का सीडीए ऑफिस रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो सेना के वित्तीय और लेखा संबंधी मामलों को देखता है। यह ऑफिस न केवल मेरठ बल्कि आसपास के क्षेत्रों में सेना के लिए लेखा सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में इस ऑफिस में सीबीआई की छापेमारी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह किसी वित्तीय अनियमितता से जुड़ा मामला है? या फिर कोई बड़ा घोटाला सामने आने वाला है? अभी तक इन सवालों के जवाब अस्पष्ट हैं, लेकिन यह कार्रवाई निश्चित रूप से चर्चा का विषय बन गई है।
कर्मचारियों में बेचैनी, बाहर अफवाहों का बाजार गर्म
जैसे ही सीबीआई की गाड़ियां ऑफिस परिसर में रुकीं, आसपास के इलाके में खबर फैलने में देर न लगी। गेट पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि ऑफिस बंद होने की कगार पर था, लेकिन टीम के आने के बाद सभी को रुकना पड़ा। देर रात तक चली इस कार्रवाई के दौरान ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ जमा होने लगी। स्थानीय लोगों और मीडिया के बीच तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। कोई इसे भ्रष्टाचार से जोड़ रहा था, तो कोई इसे किसी पुराने मामले की जांच का हिस्सा बता रहा था। लेकिन सच्चाई क्या है, यह तो सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
गोपनीयता और सस्पेंस का माहौल
सीबीआई की यह छापेमारी अपने आप में एक रहस्यमयी पहेली बन गई है। टीम ने न तो कोई बयान जारी किया और न ही यह बताया कि वे किन दस्तावेजों की तलाश में हैं। ऑफिस के बाहर मौजूद मीडियाकर्मी भी इस सस्पेंस से अछूते नहीं रहे। कैमरे और माइक लेकर खड़े पत्रकारों को हर बार खाली हाथ लौटना पड़ा। यह सीबीआई की वही पुरानी कार्यशैली है, जिसमें कार्रवाई तो तेज होती है, लेकिन जानकारी बेहद कम।
आगे क्या?
मेरठ के इस सीडीए ऑफिस में हुई छापेमारी अब लोगों के बीच उत्सुकता का केंद्र बन चुकी है। क्या यह किसी बड़े खुलासे की शुरुआत है? क्या सेना के वित्तीय प्रबंधन में कोई गड़बड़ी सामने आएगी? या फिर यह एक रूटीन जांच का हिस्सा मात्र है? इन सवालों के जवाब के लिए सभी की निगाहें अब सीबीआई की अगली चाल पर टिकी हैं। देर रात तक चली इस कार्रवाई के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।
फिलहाल, मेरठ का यह घटनाक्रम न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोर रहा है। सीबीआई की चुप्पी और दस्तावेजों की गहन पड़ताल इस बात का संकेत दे रही है कि कुछ बड़ा पक रहा है। सच सामने आने तक, यह कहानी सस्पेंस और रहस्य से भरी रहेगी।