N/A
Total Visitor
37.5 C
Delhi
Thursday, April 3, 2025

वाराणसी में मां श्रृंगार गौरी के दर्शन: भक्ति, आस्था और संघर्ष की गूंज

वाराणसी, 2 अप्रैल 2025, बुधवार। वाराणसी का ज्ञानवापी परिसर आज एक बार फिर भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन बुधवार को मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह वह खास दिन था जब साल में सिर्फ एक बार मां के भक्तों को उनके दर्शन और पूजन का सौभाग्य प्राप्त होता है। सुबह से ही परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे, शंखनाद और डमरू की ध्वनि ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया।

आस्था का सैलाब और मंदिर मुक्ति की पुकार

सुबह 8:30 बजे सत्यनारायण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4-बी से श्रद्धालुओं की एंट्री शुरू हुई। दोपहर 12 बजे तक भक्तों ने मां के दर्शन किए और मंदिर मुक्ति के लिए प्रार्थना की। ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के बैनर तले श्रद्धालुओं का एक जत्था गंगा से जल लेकर निकला। रास्ते भर भक्ति गानों पर झूमते हुए, “ज्ञानवापी मुक्त करो” के नारे लगाते हुए भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था।

इस मौके पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णुशंकर जैन भी मौजूद थे, जिन्होंने ज्ञानवापी केस में वाद दायर करने वाली चार महिलाओं के साथ श्रद्धालुओं का नेतृत्व किया। पूजा के बाद जैन ने कहा, “मां से हमारी यही प्रार्थना है कि कोर्ट में हमारी जीत हो। ज्ञानवापी में अष्ट मंडल का भव्य मंदिर दोबारा स्थापित हो, बाबा के शिवलिंग पर हो रहे वजू की ASI जांच हो, और हमें वहां पूजा का अधिकार मिले।”

पूजा का विधान और टूटे पत्थरों पर श्रद्धा

सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच करीब 25 मिनट तक विधिवत पूजा संपन्न हुई। श्रृंगार गौरी मंदिर के टूटे हुए प्राचीन पत्थरों पर श्रद्धालुओं ने सिंदूर और चंदन लगाया। मंत्रोच्चार के साथ मां की आराधना की गई, और हर भक्त के चेहरे पर आस्था की चमक साफ झलक रही थी। यह दृश्य न सिर्फ भक्ति का प्रतीक था, बल्कि एक लंबे संघर्ष की कहानी भी बयां कर रहा था।

क्या है ज्ञानवापी का विवाद?

ज्ञानवापी परिसर का इतिहास और उसका विवाद लंबे समय से चर्चा में रहा है। 1992 तक मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और पूजा की परंपरा थी, लेकिन अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया गया। तब से साल में सिर्फ एक दिन, चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन, दर्शन की अनुमति मिलती है। 18 अगस्त 2021 को पांच महिलाओं ने वाराणसी कोर्ट में नियमित पूजा के अधिकार के लिए वाद दायर किया, जिसकी सुनवाई अभी जारी है।

मां के भक्तों की एक ही कामना

श्रद्धालुओं और हिंदू पक्ष के लिए यह दिन सिर्फ दर्शन का नहीं, बल्कि अपनी मांगों को बुलंद करने का भी अवसर था। विष्णुशंकर जैन ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, “मां श्रृंगार गौरी के मूल स्थान पर पूजा का अधिकार मिले, और ज्ञानवापी का वह गौरवशाली इतिहास फिर से जीवंत हो।”

आज का दिन वाराणसी के लिए एक अनोखा संगम था—जहां भक्ति, इतिहास और कानूनी संघर्ष एक साथ नजर आए। मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के साथ ही श्रद्धालुओं की यह पुकार गूंजती रही कि उनकी आस्था को उसका पूरा हक मिले। अब सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस ऐतिहासिक विवाद का भविष्य तय करेगा।

Advertisement

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

2,300FansLike
9,694FollowersFollow
19,500SubscribersSubscribe

Advertisement Section

- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_img

Latest Articles

Translate »