नई दिल्ली, 18 फरवरी 2025, मंगलवार। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने सोमवार देर रात मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति कर उच्चतम न्यायालय के आदेश और संविधान की भावना के खिलाफ काम किया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने आधी रात को जल्दबाजी में नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है, जो हमारे संविधान की भावना के खिलाफ है।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि संशोधित कानून ने प्रधान न्यायाधीश को सीईसी चयन समिति से हटा दिया, सरकार को सीईसी का चयन करने से पहले 19 फरवरी को उच्चतम न्यायालय की सुनवाई तक इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में बैठक आयोजित करने और नए सीईसी की नियुक्ति करने के उनके फैसले से पता चलता है कि सरकार उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को दरकिनार करने और स्पष्ट आदेश आने से पहले नियुक्ति करने की इच्छुक है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चाहे वह फर्जी मतदाता सूचियां हों, भाजपा के पक्ष में कार्यक्रम हों या ‘ईवीएम हैकिंग’ के बारे में चिंताएं हों, ऐसी घटनाओं के कारण सरकार और उसके द्वारा नियुक्त सीईसी गहरे संदेह के घेरे में आते हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किये गये ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त के रूप में विवेक जोशी की नियुक्ति
निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सोमवार को नया मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया है। कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी। कुमार निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी, 2029 तक रहेगा, जिसके कुछ दिन बाद निर्वाचन आयोग अगले लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है।
हरियाणा कैडर के 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विवेक जोशी को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया है। वह 2031 तक निर्वाचन आयोग में कार्य का निर्वहन करेंगे। कानून के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं या फिर छह वर्ष के लिए आयोग में रह सकते हैं।