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Thursday, April 3, 2025

ठुमरी की मधुर स्वरलहरियों का उत्सव: काशी में गूंजेगी संगीत की बयार

वाराणसी, 2 अप्रैल 2025, बुधवार। भारतीय शास्त्रीय संगीत की चारों पटों में अपनी खास पहचान रखने वाली ठुमरी गायन की विधा अब काशी की फिजाओं में एक नया रंग बिखेरने को तैयार है। नगर की सुप्रसिद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था काशी कला कस्तूरी ने इस अनूठी कला को बढ़ावा देने और उदीयमान कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए अखिल भारतीय ठुमरी गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। यह संगीतमय महाकुंभ न सिर्फ प्रतिभाओं को निखारेगा, बल्कि विजेताओं को करीब 35 हजार रुपये के नकद पुरस्कारों से भी नवाजेगा।

दो दिन तक चलेगा पंजीकरण का दौर

संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. शबनम खातून ने बताया कि यह प्रतियोगिता 3 और 4 अप्रैल को वाराणसी के रथयात्रा स्थित कन्हैया लाल स्मृति भवन में आयोजित होगी। पंजीकरण का कार्य भले ही पूरा हो चुका हो, लेकिन जो संगीत प्रेमी अब तक इस अवसर से चूक गए हैं, उनके लिए अभी भी उम्मीद बाकी है। वे 3 अप्रैल को सुबह 9 बजे तक आयोजन स्थल पर पहुंचकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। यह मौका है अपनी प्रतिभा को देश-दुनिया के सामने लाने का!

8 राज्यों और श्रीलंका से जुटेंगे 64 सुर साधक

इस प्रतियोगिता में देश-विदेश के संगीत साधकों की भागीदारी इसे और भी खास बना रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे आठ राज्यों से 64 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इतना ही नहीं, श्रीलंका से भी एक विदेशी कलाकार इस मंच पर अपनी ठुमरी की प्रस्तुति से समां बांधने को तैयार है। यह आयोजन भारतीय संगीत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने का एक शानदार प्रयास है।

दो वर्गों में बंटेगा पुरस्कारों का खजाना

प्रतियोगिता को दो वर्गों में बांटा गया है- वरिष्ठ और कनिष्ठ। वरिष्ठ वर्ग (21 वर्ष से अधिक उम्र) में प्रथम पुरस्कार के रूप में 11 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 6 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 3 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा 1100-1100 रुपये के सांत्वना पुरस्कार भी होंगे। वहीं, कनिष्ठ वर्ग (21 वर्ष से कम उम्र) में प्रथम पुरस्कार 5100 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 3 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 2500 रुपये का होगा। इस वर्ग में भी 1100-1100 रुपये के सांत्वना पुरस्कार प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाएंगे।

ठुमरी का दो दिवसीय दंगल

संस्था की उपाध्यक्ष और वरिष्ठ उपशास्त्रीय गायिका विदुषी सुचरिता गुप्ता ने बताया कि इस संगीतमय दंगल का शुभारंभ 3 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे होगा। वहीं, समापन समारोह और पुरस्कार वितरण 4 अप्रैल को दोपहर 2 बजे से शुरू होगा। वरिष्ठ वर्ग के प्रथम विजेता को ठुमरी साम्राज्ञी सिद्धेश्वरी देवी स्मृति संगीत सम्मान और कनिष्ठ वर्ग के प्रथम विजेता को पंडित महादेव मिश्र स्मृति संगीत सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। समापन समारोह में दोनों वर्गों के प्रथम विजेताओं की ठुमरी प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठेंगे।

काशी में संगीत का अनूठा संगम

यह प्रतियोगिता न केवल ठुमरी गायन की समृद्ध परंपरा को जीवंत रखने का प्रयास है, बल्कि युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का एक सुनहरा मंच भी है। काशी की पावन धरती पर जब देश-विदेश के सुर एक साथ गूंजेंगे, तो यह आयोजन संगीत प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाएगा। तो तैयार हो जाइए, ठुमरी की मधुर स्वरलहरियों में डूबने के लिए!

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