बंबई उच्च न्यायालय ने शक्ति मिल्स परिसर में 22 वर्षीय फोटो पत्रकार के साथ गैंगरेप के मामले के तीन दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। अदालत ने कहा कि वे  उनके द्वारा किए गए अपराधों का पश्चाताप करने के लिए आजीवन कारावास की सजा भुगतने के पात्र हैं।

न्यायमूर्ति साधना जाधव और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने विजय जाधव, मोहम्मद कासिम शेख और मोहम्मद अंसारी को सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि करने से इनकार कर दिया और उनकी सजा को उनके शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया। यह मामला 22 अगस्त 2013 का है जब अपने एक साथी के साथ एक महिला फोटो जर्नलिस्ट शक्ति मिल परिसर में कवरेज करने गई थी।

दरअसल, महालक्ष्मी इलाके में सालों से बंद पड़ी यह मिल वीरान रहती है। उस दिन शाम के 6 बजे रहे थे। महिला पत्रकार और उसका साथी जब वहां पहुंचे तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने खुद को पुलिस बताते हुए उन्हें फोटो लेने से रोका। उन लोगों ने कहा कि पहले आप लोग हमारे अधिकारी से इजाजत लें तब फोटो लेना। फिर वे महिला पत्रकार और उसके साथी को अंदर ले गए। अंदर ले जाकर दोनों पर हमला कर महिला पत्रकार के साथी को वहीं बांध दिया।

उसके बाद उस महिला पत्रकार के साथ पांच लोगों ने गैंगरेप किया। दो घंटे बाद किसी तरह वे दोनों अपनी जान बचाकर वहां से अस्पताल भागे। अस्पताल में डॉक्टरों ने जैसे ही लड़की की हालत देखी सारा मामला समझ गए। डॉक्टरों ने पुलिस को सूचना दी। महिला पत्रकार के साथ गैंगरेप होने की खबर से मानो पुलिस भी सन्न रह गई।

आनन-फानन में कई टीमें बना कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई। 72 घंटे के भीतर ही पुलिस ने सभी पांच आरोपियों को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान एक और गैंगरेप का मामला सामने आया। इनमें से तीन आरोपियों ने शक्ति मिल में ही गैंगरेप की एक और वारदात को अंजाम दिया

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