नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2025, शुक्रवार। संसद के गलियारों में सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा। कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई और राज्यसभा में उपनेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा को आड़े हाथों लिया। दोनों नेताओं ने एक स्वर में कहा, “तानाशाही और फासीवाद अब भाजपा के डीएनए का हिस्सा बन चुके हैं।” यह जंग अब सिर्फ संसद की कुर्सियों तक सीमित नहीं, बल्कि देश की जनता के सामने सच्चाई लाने की लड़ाई बन गई है।
“सत्तारूढ़ दल ही बाधा डाल रहा है” – प्रमोद तिवारी
राज्यसभा के उपनेता प्रमोद तिवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है कि सत्तारूढ़ दल खुद संसद की कार्यवाही को ठप कर रहा है।” मणिपुर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के लिए तीन घंटे तय किए गए थे, लेकिन सरकार ने इसे महज 50 मिनट में समेट दिया। तिवारी ने खुलासा किया कि सरकार ने जानबूझकर रात में राज्यसभा की कार्यवाही चलाई, ताकि गंभीर मुद्दों पर लंबी बहस से बचा जा सके। “गुरुवार को बिना सदस्यों की मंजूरी के सुबह 4 बजे तक वक्फ संशोधन विधेयक और मणिपुर पर चर्चा कराई गई। यह नियम 37 का खुला उल्लंघन है।” उन्होंने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर भी निशाना साधा, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ लोकसभा में बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए चर्चा में हैं।
“संसद अब PM का दरबार बन गया” – गौरव गोगोई
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा, “संसद अब जनता की आवाज का मंच नहीं, बल्कि PM मोदी का दरबार बन गया है। यहां उनकी तारीफ तो सुनी जाती है, लेकिन आलोचना को कुचल दिया जाता है।” गोगोई ने तथ्यों के साथ बताया कि सत्तारूढ़ दल के सांसद नियमित रूप से सदन को बाधित कर जवाबदेही से बच रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक पर सवाल उठाते हुए उन्होंने भाजपा से पूछा, “2013 में आपने इस अधिनियम के संशोधन का समर्थन क्यों किया था?”
गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री की भी आलोचना की, जिन्होंने लोकसभा में सोनिया गांधी का अप्रत्यक्ष जिक्र किया, जबकि वह उस सदन की सदस्य नहीं हैं। उन्होंने राहुल गांधी को बजट सत्र में सिर्फ कुछ मिनट बोलने की इजाजत देने का मुद्दा भी उठाया। “नेता विपक्ष को बोलने का हक नहीं दिया जा रहा। यह लोकतंत्र पर हमला है।”
अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर सवाल
गोगोई ने अमेरिका के 27% टैरिफ के असर को लेकर सरकार को घेरा। “इसने भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को हिला दिया। मध्यम वर्ग की मेहनत की कमाई डूब गई, लेकिन सरकार चुप है।” उन्होंने PM मोदी से बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ शुक्रवार को हुई मुलाकात का ब्योरा मांगा। “यूनुस ने पूर्वोत्तर में चीनी निवेश पर विवादास्पद बयान दिया था। क्या PM ने इसे उठाया? बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर लिखे पत्र का क्या हुआ?” गोगोई ने उम्मीद जताई कि इन मुद्दों पर PM ने सख्त रुख अपनाया होगा।
कांग्रेस का संकल्प: “लोकतंत्र बचाएंगे”
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ आरोपों का मंच नहीं, बल्कि कांग्रेस का संकल्प भी थी। गोगोई और तिवारी ने साफ किया कि उनकी पार्टी संसद को जनता की आवाज बनाए रखने के लिए हर लड़ाई लड़ेगी। “भाजपा संसद को बाधित कर सकती है, लेकिन हम जनता के मुद्दों को दबने नहीं देंगे।” मणिपुर से लेकर अर्थव्यवस्था तक, और वक्फ विधेयक से लेकर विदेश नीति तक—कांग्रेस ने हर मोर्चे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
एक नई जंग की शुरुआत
यह सियासी जंग अब संसद से सड़क तक पहुंच रही है। कांग्रेस का यह हमला न सिर्फ भाजपा के लिए चुनौती है, बल्कि देश की जनता के सामने एक सवाल भी छोड़ गया—क्या संसद सचमुच लोकतंत्र का मंदिर रह गई है, या यह सत्ता का खेल बनकर रह गई है? जवाब का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि यह विवाद अभी थमने वाला नहीं। कांग्रेस की यह हुंकार नई दिल्ली से पूरे देश में गूंज रही है—लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई जारी रहेगी!