राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा शहर में बहुसंख्यक समुदाय के सैकड़ों परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।उनका आरोप है कि उन्हें क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदायों से खतरों का सामना करना पड़ रहा है। टोंक शहर के वार्ड 12 और 21 में रहने वाले परिवारों ने सोमवार को अपने-अपने घरों के बाहर बोर्ड लगा दिए। पोस्टरों में उन्होंने लिखा है कि उन्हें अल्पसंख्यक समुदायों से खतरा महसूस हो रहा है। वहीं परिवारों ने मंगलवार को मालपुरा एसडीएम कार्यालय को ज्ञापन देकर न्याय की मांग की है।

टोंक कस्बे के वार्ड 12 व 21 में रहने वाले इन परिवारों ने कस्बे में विरोध मार्च निकाला और न्याय की मांग की है। बाद में उन्होंने ज्ञापन सौंपा जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सुरक्षा की मांग की है।

मालपुरा के एसडीएम राकेश कुमार मीणा को ज्ञापन देने वाले लोगों ने आरोप लगाया कि मालपुरा में 1952 से सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है। उनका दावा है कि करीब 800 परिवार अपने घर बेचकर इलाके से पलायन कर चुके हैं। ये परिवार पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।

विरोध मार्च के बाद मालपुरा प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने कहा कि अल्पसंख्यकों से डर का आरोप लगाते हुए घर के बाहर पोस्टर टांगने की गतिविधियां “शहर के सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली कार्रवाई” हैं। अधिकारियों ने बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को अपने घरों से ऐसे पोस्टर हटाने की चेतावनी दी है।

राजस्थान के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से टोंक जिले के मालपुरा में हिंदू परिवारों के पलायन के मामले में गंभीरता से संज्ञान लेकर लोगों को न्याय एवं सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की मांग की है। डॉ. पूनियां आज इस मामले पर भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि मालपुरा वह कस्बा है, जहां बहुसंख्यक लोग बहुत शांति से सब लोगों का सम्मान करते हुए रहते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अनेकों बार वहां दंगे हुए और सांप्रदायिक तौर पर वहां अशांति के मामले भी सामने आये।

मालपुरा क्षेत्र में लगभग 300 परिवारों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा और डर के माहौल में जीवनयापन कर रहे परिवारों को अपने घर के बाहर पोस्टर भी चस्पा करने पड़े। इस मामले का मुख्यमंत्री को गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिये, जिससे बहुसंख्यक लोग शांति से रह सके।

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