नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने गुरुवार, 29 जुलाई, 2021 को राष्ट्र को संबोधित किया। लगभग 24 मिनट लंबे उद्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बापू राष्ट्रपति महात्मा गांधी के सपनों के भारत से लेकर आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत का मंत्र साकार करने की दिशा में 2020 में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर उल्लेखित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में जैसे – जैसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अलग – अलग फीचर्स हकीकत में बदलेंगे, हमारा देश एक नए युग का साक्षात्कार करेगा।    

नई शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण के बड़े फैक्टर्स में से एक
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों और विद्यार्थियों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आसानी से आत्मसात करने के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक वर्ष में देश के आप सभी महानुभावों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, नीतिकारों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में बहुत मेहनत की है। प्रधानमंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़े फैक्टर्स में से एक बताते हुए कहा कि भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे या कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने युवाओं को वर्तमान में कैसी शिक्षा और दिशा दे रहे हैं। 

21वीं सदी के भारत और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 21वीं सदी की बात करते हुए युवाओं को पुराने बंधनों, पिंजरों से मुक्त करते हुए एक्सपोजर देने की वकालत की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस प्रोग्राम को युवाओं के लिए फ्यूचर ओरिएंटेड बनाने वाला बताया। पीएम मोदी ने कहा कि ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ युवाओं को यह विश्वास दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके साथ है, उनके हौसलों के साथ है। युवा मन जिस दिशा में भी सोचना चाहे, खुले आकाश में जैसे उड़ना चाहे, देश की नई शिक्षा व्यवस्था उसे वैसे ही अवसर उपलब्ध करवाएगी।

समर्थ और आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को हर दिशा में समर्थ और आत्मनिर्भर होना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के शिक्षा ढ़ांचे में हो रहे सुधारों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हमने दशकों से देखा है जब समझा जाता था कि अच्छी पढ़ाई के लिए विदेश ही जाना होगा। लेकिन अच्छी पढ़ाई के लिए विदेशों से स्टूडेंट्स भारत आएं, ये अब हम देखने जा रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे युवाओं को दुनिया से एक कदम आगे होना पड़ेगा। उन्होंने देश को हेल्थ, डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी समेत हर क्षेत्र में समर्थ और आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। 
 
बापू के सपनों के भारत का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बापू के सपनों के भारत का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि आठ राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज, पांच भारतीय भाषाओं- हिंदी – तमिल, तेलुगू, मराठी और बांग्ला में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में पढ़ाई का प्रावधान बापू के सपनों को साकार करने की दिशा में एक और कदम है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय साइन लैंग्वेज को पहली बार एक भाषा विषय का दर्जा मिला है। अब छात्र इसे भाषा के तौर पर पढ़ पाएंगे।  

10 योजनाओं का अनावरण किया 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 योजनाओं का अनावरण किया। इनमें ये प्रमुख हैं – 
उच्च शिक्षा में एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी)
भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग स्नातक कार्यक्रम
पहली कक्षा के छात्रों के लिए विद्या प्रवेश
माध्यमिक स्तर पर एक विषय के रूप में साइन लैंग्वेज
एनसीईआरटी द्वारा डिजाइन एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम निष्ठा 2.0
सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले ग्रेड तीसरी, पांचवीं और आठवीं के छात्रों के लिए स्ट्रक्चर्ड असेसमेंट फॉर एनालिसिस लर्निंग लेवल (SAFAL) पहल
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) को समर्पित एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म,
नेशनल डिजिटल एजुकेशन आर्किटेक्चर (एनडीईएआर)
नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम (एनईटीएफ) 

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