हिमाचल प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर में बंद पड़ी सभी शक्तिपीठ बज्रेश्वरी, ज्वालामुखी, मां चामुंडा और नयनादेवी मंदिर के कपाट सहित अन्य धार्मिक स्थल करीब तीन माह बाद आज से श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। शक्तिपीठ ज्वालामुखी सुबह छह बजे से ही लोग दर्शन के लिए पहुंचे। पहला दिन होने के कारण आज श्रद्धालुओं की संख्या कम ही नजर आई। श्रद्धालुओं को शक्तिपीठों में जाने और प्रसाद चढ़ाने की छूट दी गई है। धार्मिक स्थलों में हवन, यज्ञ, कन्या पूजन, कीर्तन, लंगर और घंटी बजाने बजाने पर प्रतिबंध है। श्रद्धालुओं को मंदिरों में बैठने, ज्यादा देर खड़े रहने की मनाही है। पुजारी न प्रसाद बांटेंगे और न मौली बांधेंगे।

ज्वालामुखी में प्रशासन द्वारा बिना मास्क मंदिर में प्रवेश वर्जित किया गया है साथ ही दो गज की नियमित दूरी का पालन किया जा रहा है।

मंदिर के गर्भ गृह में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। मंदिर में किसी भी श्रद्धालु को रुकने नहीं दिया जा रहा है और बाहरी श्रद्धालुओं के लिए पर्ची सिस्टम अपनाया गया है, जिसमें सभी का नाम पता दर्ज किया जा रहा है, उसके बाद ही दर्शनों की अनुमति दी जा रही है।

मंदिर में भजन, कीर्तन, मुंडन व लंगर व्यवस्था पर सरकार के आगामी आदेशों के तहत प्रतिबंध कायम है। वहीं मंदिर खुलने से बाजार में भी रौनक लौट आई है, लंबे अंतराल के बाद मंदिर के कपाट खुलने से दुकानदारों को आर्थिकी सुधरने की आस जगी है।

मंदिर न्यास सदस्य सौरभ शर्मा ने बताया कि मंदिर के अंदर हर प्रकार के आयोजनों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेगा। श्रद्धालु केवल दर्शन कर पाएंगे।

By anita

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