कुंभ मेला स्वास्थ्य की ओर से नामित 11 लैब ने करीब ढाई लाख कोविड जांच की हैं। इनमें दो लैब ने ही एक लाख 23 हजार लोगों की जांच की है। फर्जी निगेटिव रिपोर्ट के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच रिपोर्ट में दर्ज मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सत्यापन शुरू कर दिया है। इसके लिए 10 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है।

स्वास्थ्य विभाग की इस हास्यास्पद सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। ढाई लाख जांच रिपोर्ट में दर्ज नंबरों पर संपर्क करने में महीनों लग जाएंगे। हालांकि, इनमें कई मोबाइल नंबर ही फर्जी हैं तो कई नंबर सैकड़ों लोगों की रिपोर्ट में अंकित हैं। 

कुंभ मेले में ढाई लाख श्रद्धालुओं की कोरोना जांच अकेले मेला प्रशासन की ओर से करवाई गई। अब कोरोना जांच की घोटाले की बात सामने आने से जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर पर हड़कंप मचा है।
कम से पांच महीने का समय लग जाएगा
मामले में जहां शासन के आदेश पर जिलाधिकारी सी रवि शंकर की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता वाली कमेटी जांच कर रही है। वहीं, जब कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिष्ठान की गर्दन फंसती दिखी तो उसने भी अपनी चार सदस्यीय कमेटी की जांच बैठा दी।

यही नहीं जांच के बाद कुंभ मेले में कोरोना जांच कराकर गए लोगों का मोबाइल से सत्यापन करना शुरू कर दिया, लेकिन हैरत की बात यह है कि मेला स्वास्थ्य प्रशासन के फिलहाल दस कर्मचारी ही मौजूद हैं। वह सभी को भी रोजाना मोबाइल फोन पर सत्यापन करने के लिए लगाए तो इसमें लंबा वक्त लग जाएगा। 

यदि एक व्यक्ति से बात करने के लिए कम से कम तीन मिनट का समय भी लगाया जाए तो एक घंटे में बीस और एक कर्मचारी आठ घंटे में 160 लोगों से ही बात कर सकता है। दस कर्मचारी लगे तो दिनभर में वह 1600 लोगों से पूछताछ कर सकते हैं। ऐसे में ढाई लाख लोगों का सत्यापन करने में कम से पांच महीने का समय लग जाएगा।

जिसमें अवकाश के दिन भी शामिल रहेंगे, जबकि पांच माह तक कुंभ मेला अधिष्ठान स्वास्थ्य कार्यालय रहने की भी संभावना न के बराबर है। क्योंकि कुंभ मेला समाप्त हो चुका है और सभी व्यवस्थाएं अस्थायी तौर पर की गई थी।  
कुंभ मेले में कोरोना जांच कराकर गए ढाई लाख श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन नंबरों पर बात करके उनसे जांच कराने का सत्यापन करने का काम वास्तव में बहुत बड़ा तो है, लेकिन सच्चाई जानने के लिए यह करना तो पड़ेगा ही। इसलिए कर्मचारी सत्यापन करने में लगे हुए हैं।

By anita

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