केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश में जिस तरह से सड़क हादसों में लोगों की मौतें हो रही हैं, वो एक बड़ी चिंता का विषय है। दुनिया में होने वाली कुल सड़क दुर्घटनाओं में से अकेले भारत में 11 फीसदी हादसे होते हैं। ये एक साइलेंट पैंडेमिक (खामोश महामारी) की तरह है। शुक्रवार को राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दो केंद्रों का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में ये बात कही है।

राजनाथ सिंह ने कहा, बड़े आश्चर्य और चिंता की बात है कि हमारे देश में दुनिया के कुल वाहनों में से तीन प्रतिशत से भी कम हैं लेकिन दुर्घटनाएं 11 प्रतिशत के करीब हैं। देश में सड़क हादसों में हर साल 4.5 से 5 लाख दुर्घटनाएं और 1.5 लाख दुर्भाग्यपूर्ण मौतें होती हैं। इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि ज्यादातर लोग उतनी सावधानी नहीं बरतते, जितनी कि बरतनी चाहिए। सड़क हादसों में कमी आए, इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति को मंजूरी दी है। इसके अलावा ‘मोटर व्हीकल एक्ट’ भी लाया गया है।

राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन मुख्यालय में दो केंद्रो, ‘सड़क,पुल,हवाई क्षेत्र और सुरंगों के लिए उत्कृष्टता केंद्र’ और ‘सड़क सुरक्षा और जागरूकता के लिए उत्कृष्टता केंद्र’ का उद्घाटन किया। सिंह ने कहा कि अपनी स्थापना के समय से ही, बीआरओ दूरदराज के इलाकों में सड़क, सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण कर, राष्ट्र की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है।राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले पांच-सात सालों में, बीआरओ ने अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। वह चाहे नए-नए विश्वस्तरीय निर्माण कार्यों जैसे ‘अटल टनल, रोहतांग’ का लोकार्पण हो, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नए मार्ग का

निर्माण हो, बीआरलो लगातार नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। बीआरओ की सड़कें जहां-जहां भी बनी हैं, वह खुद अपने आप में आकर्षण का विषय होती हैं। जहां उनकी सड़कों की गुणवत्ता उत्तम होती है, वहीं सड़क सुरक्षा के बारे में उनके साइनबोर्ड बड़े रोचक तरीके से लोगों को जागरूक भी करते हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार बीआरओ कर्मियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है। वह चाहे नीतिगत समर्थन हो, या फिर आवंटन संबंधी सहयोग हो, या इसी प्रकार के अन्य सहयोग हों, सरकार बीआरओ के लिए, यथा-संभव हर कदम उठा रही है और आगे भी उठाएगी।

By anita

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