पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फिर एकबार कश्मीर राग अलापा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक कि नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के अपने अगस्त 2019 के फैसले को वापस नहीं ले लेती। इस्लामाबाद में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, इमरान खान ने कहा कि क्षेत्र की पूरी क्षमता तभी हासिल की जा सकती है जब अफगानिस्तान में स्थिति स्थिर हो और पाकिस्तान और भारत के बीच बेहतर संबंध हों।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब जैसे देशों द्वारा समर्थित बैक-चैनल संपर्कों के बाद, भारत और पाकिस्तान की सेनाओं ने फरवरी में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 2009 के युद्धविराम के लिए खुद को फिर से प्रतिबद्ध किया। हालांकि, सामान्य व्यापार संबंधों को फिर से शुरू करने के लिए इमरान खान की सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रयास उनकी सरकार के इस कदम के विरोध के कारण विफल हो गए।

भारत के साथ पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, 5 अगस्त, 2019 को कश्मीर पर उनके (भारत के) एकतरफा फैसले के बाद से और अंतरराष्ट्रीय कानूनों व संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के उल्लंघन के कारण, हमारे लिए व्यापार को सामान्य करना बहुत मुश्किल है। क्योंकि यह कश्मीरी लोगों के बलिदान के साथ विश्वासघात होगा।” उन्होंने कहा, “इसलिए जब तक भारत अपने उस फैसले को पलटता नहीं है, तब तक हमारे संबंध नहीं सुधर सकते।”

इससे पहले भी इमरान खान ने कहा था कि पाकिस्तान भारत के साथ संबंधों को तब तक सामान्य नहीं कर सकता जब तक कि वह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के अपने 2019 के फैसले को उलट नहीं देता। भारत ने पाकिस्तान की मांगों को उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए खारिज कर दिया है।

खान ने आगे कहा, “अगर रिश्ते नहीं सुधरे तो यह भारत, पाकिस्तान और पूरे मध्य एशिया के लिए नुकसान होगा क्योंकि पूरे क्षेत्र को जोड़ा जा सकता है।”

यह देखते हुए कि मध्य एशियाई राज्य व्यापार के लिए पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक पहुंच सकते हैं, उन्होंने कहा, “लेकिन अगर भारत के साथ हमारे संबंध सुधरते हैं, तो चीन एक पक्ष है और पाकिस्तान पूरे क्षेत्र को जोड़ने की एक महत्वपूर्ण स्थिति में है। लेकिन यह सब भारत पर निर्भर है।  उन्होंने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर में जो एकतरफा कदम उठाए थे, उसे वापस ले लें। जब तक वे पीछे नहीं हटते, पूरा मामला यहीं फंसा हुआ है।’

By anita

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *