सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन विक्रेता कंपनियों के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल की बिक्री मई में गिरकर 17.9 लाख टन रह गई, जो पिछले एक साल का सबसे निम्न स्तर है। हालांकि, पिछले साल मई के मुकाबले यह खपत लगभग 13 फीसदी अधिक रही, यह कोविड से पहले के 24.9 लाख टन के स्तर से 28 फीसदी कम रही। 

उल्लेखनीय है कि देश में पिछले साल मई में लगाया गया लॉकडाउन दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन में से एक था। इस दौरान पूरे देश में सभी तरह की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों को लगभग ठप कर दिया गया था। इस साल, हालांकि संक्रमण दर बहुत गंभीर है, लेकिन प्रतिबंध उतने सख्त नहीं रहे हैं। लोगों का आवागमन पिछले साल की तरह बाधित नहीं हुआ। कई राज्यों में कारखाने खुले रहे हैं जबकि राज्यों के बीच माल की आवाजाही भी उतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं हुई।

देश में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन डीजल की मांग मई 2021 में गिरकर 48.9 लाख टन रह गई, जो इससे पिछले महीने से 17 फीसदी और मई 2019 के मुकाबले 30 फीसदी कम रही है। एयरलाइंस ने कम क्षमता के साथ परिचालन करना जारी रखा, लेकिन मई में जेट ईंधन (एटीएफ) की बिक्री दो लाख 48 हजार टन रही, जो अप्रैल 2021 की तुलना में 34 फीसदी और मई 2019 की तुलना में 61.3 फीसदी कम थी। बता दें कि पिछले साल मई में जेट ईंधन की बिक्री एक लाख नौ हजार टन रही थी।

वहीं, मई 2021 में रसोई गैस सिलेंडर की बिक्री मात्रा साल-दर-साल छह फीसदी घटकर 21.6 लाख टन रही। लेकिन यह मई 2019 में बेचे गए 20.3 लाख टन की तुलना में छह फीसदी अधिक थी। एलपीजी एकमात्र ईंधन रहा जिसने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान वृद्धि दर्ज की थी क्योंकि सरकार ने कोविड -19 राहत पैकेज के हिस्से के रूप में मुफ्त सिलिंडर दिए थे।

By anita

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