राज्य के स्कूलों में प्राथमिक से लेकर प्लस टू तक के सवा लाख शिक्षकों की नियुक्ति पर लगी रोक को लेकर शुक्रवार को पटना हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अब सोमवार 31 मई को इस मामले पर फिर बहस होगी। राज्य सरकार की अपील पर उच्च न्यायालय की हरी झंडी मिलती है, तब भी नियोजन की प्रक्रिया पूरी करने में तीन से चार हफ्ते का वक्त और लगेगा। यानी जुलाई 2019 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे करीब सवा लाख शिक्षक अभ्यर्थियों को करीब एक माह और धैर्य रखना होगा।

इस बीच शिक्षा विभाग ने ब्लाइंड फेडरेशन द्वारा दिव्यांग आरक्षण को लेकर दायर वाद पर और विस्तृत तैयारी आरंभ की है। शनिवार को विभाग के विशेष सचिव सह माध्यमिक निदेशक गिरिवर दयाल सिंह ने जिलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से घंटे भर की बैठक रखी है। अपराह्न 2 से 3 बजे आहूत इस बैठक में सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में दिव्यांग जनों हेतु कुल रिक्ति और छठे चरण के नियोजन में दिव्यांग जनों द्वारा किये गये आवेदनों की कुल संख्या के साथ शामिल होने को कहा गया है।

इसमें दिव्यांग जनों के लिए जिला स्तर पर समेकित कुल रिक्ति, दृष्टि दिव्यांग, मूक बधिर, चलन दिव्यांग और मनोविकार दिव्यांग के लिए अलग-अलग रिक्ति का ब्यौरा भी मांगा गया है। माना जा रहा है कि सोमवार की सुनवाई के पूर्व शिक्षा विभाग अपने आंकड़े को और अपडेट करने में जुटा है। विदित हो कि छठे चरण के शिक्षक नियोजन के तहत प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षकों के रिक्त करीब सवा लाख पदों पर क्रमश: 1 जुलाई और 5 जुलाई 2019 को शिक्षा विभाग ने नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था।

इसमें 30020 पद माध्यमिक-उच्च माध्यमिक के जबकि शेष पद प्रारंभिक विद्यालयों के हैं। नियोजन का शिड्यूल विभिन्न कारणों से करीब आधा दर्जन बार स्थगित हुआ और घोषित तिथियों पर नियुक्ति पत्र नहीं बंटे। मिली जानकारी के मुताबिक प्राय: सभी नियोजन इकाइयों द्वारा मेधा सूची तैयार कर उसे जिले के एनआईसी के वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है।

नियोजन को हरी झंडी मिलने के बाद रोस्टर बिंदु के मुताबिक चयन सूची बनेगी, चयनितों के प्रमाणपत्रों का वैरिफिकेशन होगा, काउंसेलिंग होगी तब जाकर नियुक्ति पत्र वितरित होंगे और इन सबमें करीब चार सप्ताह तो लग ही जायेंगे।

By anita

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