पंजाब में कृषि कानूनों का विरोध लगातार जारी है। विधायक नवजोत सिद्धू ने मंगलवार को किसानों के हक में अपने आवास पर काला झंडा लगाया। सिद्धू लगातार किसानों के हक में अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने अपने पटियाला और अमृतसर स्थित आवासों पर काला झंडा लगाया।

इससे पहले सिद्धू ने ट्वीट किया था कि किसानों को अपनी फसलों पर मात्र अपने अधिकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य चाहिए। किसानों को किसी कर्जमाफी की जरूरत नहीं है। किसान कर्ज में हैं क्योंकि फसल की लागत, फसल की कीमत से अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना सिद्धू ने एक बार फिर उन पर तंज कसते हुए कहा कि आपके पूंजीपति दोस्तों के विपरीत किसानों को लोगों का पैसा नहीं चाहिए। किसानों को अपनी सही आमदनी चाहिए। 

किसानों और केंद्र सरकार के बीच 7वें चरण की बैठक के पहले भी सिद्धू ने एक ट्वीट कर मोदी सरकार को किसानों की मांगें मानने की नसीहत दी थी। इसी तरह 8वें चरण की बैठक से पहले भी ट्वीट कर सिद्धू ने किसानों का समर्थन किया था। किसान आंदोलन से पहले नवजोत सिंह दो वर्ष तक अपने पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के लोगों के संपर्क में नहीं रहे।

किसान आंदोलन से मिले राजनीतिक अवसर को सिद्धू भुनाने में जुटे हैं। वह टि्वटर पर बेहद सक्रिय हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ की अगुवाई में पार्टी के विधायकों व मंत्रियों ने शंभू बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में बड़ा प्रदर्शन किया था लेकिन सिद्धू इसमें शामिल नहीं हुए थे।

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) से आग्रह किया था कि वे 28 मई से पटियाला में प्रस्तावित अपना तीन दिवसीय धरना न दें। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के पटियाला में धरने से पंजाब में संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

By anita

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