वाराणसी:पूरे विश्व में कोरोना महामारी बन चुकी है। कोरोना से मुक्ति के लिए महादेव की नगरी काशी में जनपदोध्वंस रक्षा अभिषेक का आयोजन किया गया। वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में पूरे विधि-विधान से देश के 12 नदियों के जल से पार्थिव शिवलिंग के द्वादश ज्योतिर्लिंगों के स्वरूप का रुद्राभिषेक किया गया। रुद्राभिषेक के बाद 125 तरह के औषधियों से विशेष हवन भी किया गया।

अनुष्ठान की शुरुआत से पहले भगवान शंकर के पंचमुखी प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। उसके बाद बाबा विश्वनाथ के दंड का पूजन कर उसकी स्थापना की गई। उसके बाद वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्र्त्रोचार के बीच द्वादश ज्योतिर्लिंग का आह्वान किया। उसके बाद यजमानों ने संकल्प के बाद द्वादश ज्योतिर्लिंग का रुद्राभिषेक किया।

12 नदियों और 3 सागर के जल से हुआ रुद्राभिषेक

वाराणसी में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में 12 नदियों और 3 सागर के जल से कुशदक प्रक्रिया के तहत द्वादश ज्योतिर्लिंगों का रुद्राभिषेक किया गया। इन नदियों में गंगा, यमुना, सरस्वती, कृष्णा, ताप्ति, नर्मदा, शिप्रा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, गोदावरी एवं अलकनंदा का जल शामिल था।

ब्रह्म सेना के डॉ. संतोष ओझा ने बताया कि जनपदोध्वंस उल्लेख आचार्य चरक के ग्रन्थ ‘चरक संहिता’ में मिलता है। काशी में इसके पहले इस अनुष्ठान का आयोजन गोस्वामी तुलसीदास के काल में महामारी से मुक्ति के लिए हुआ था। वर्तमान समय में पूरे विश्व में कोरोना महामारी की मार झेल रहा है। ऐसे में महामारी से मुक्ति के लिए इस अनुष्ठान का आयोजन किया गया।

By anita

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