पहाडों पर बारिश से बुरा हाल, भूस्खलन से कई सड़कें ध्वस्त, बादल फटने से जगह जगह तबाही
बच्चे थे तो पहाड़ के गांव में अक्सर बुजुर्ग सवाल करते “बताओ, ठंड माघ में होती है कि मेघ में” हम उछल कर विश्वास से जवाब देते ‘माघ” में, लेकिन बुजुर्ग कहते नहीं “मेघ” आने पर। बच्चे अपनी जगह सही होते क्योंकि माघ माह सर्दियों में ही पड़ता है लेकिन बुजुर्गों का तजुर्बा भी सही था। आज बचपन याद आ रहा है क्योंकि नयी टिहरी में लगातार हो रही बारिश से मई में भी बहुत ठंड पड रही है। लोग गरम कपड़े पहनने को मजबूर हैं और रात को रजाई ओढ़नी पड़ी रही है।
उत्तराखंड में मानसून से पहले ही मई में मौसम के तेवरों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। एक मई से ही पहाड़ों पर जमकर बारिश होने के साथ ही अतिवृष्टि हो रही है। आए दिन बादल फटने, भूस्खलन और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं कई जगह कहर बनकर टूट रही है।
मौसम में इस बदलाव की वजह मौसम विज्ञानी बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में बने चक्रवाती संरचना, ताऊते तूफान के उत्तर पश्चिम की तरफ बढ़ते असर और हिमालई क्षेत्र में बने पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने को बता रहे है।
बहरहाल उत्तराखंड में मौसम का मिजाज इस कदर बदल गया है कि सिखों के पवित्रस्थल चमोली के हेमकुंड साहिब तथा बदरीनाथ की ऊंची चोटियों के साथ ही केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है। मौसम का मिजाज इस कदर बदल गया है कि पहाड़ों पर जैसे ठंड लौट आई है। लोगों ने फिर से गरम कपड़े निकाल दिए हैं और रात को इतनी ठंड हो रही है कि निचले रिहायसी इलाकों में बिना रजाई का सोना कठिन हो रहा है। साधारण कंबल में घरों के अंदर दिन में भी काम नही चल रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में पिछले तीन दिन से लगातार बारिश हो रही है। पहाड़ों के ऊंछाई इलाकों में जहां बर्फ नही गिर रही है वहां भीषण बारिश हो रही है।
पहाड़ों पर जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक मौसम में ज़बरदस्त बदलाव आया हुआ है और यह परिवर्तन पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण है। इस बदलाव की वजह मौसम विज्ञानी विक्षोभ के अलावा पहले से ही मानसून के 10 से 15 दिन आगे शिफ्ट होना भी मानते है। उनका कहना है कि पहाड़ों पर गर्मी करीब 100 दिन पड़ती है लेकिन इस बार वायुमंडल के मौसम चक्र में काफी बदलाव आया हैं और इसका असर तीन माह से अधिक समय तक रहना बताया जा रहा है। अब तक गर्मी के लगभग 50 दिन निकल चुके है और आगे भी मौसम में बहुत बदलाव संभव नही है। इस तरह से इस बार गर्मी बमुश्किल कुल 30 से 35 दिन ही रह सकती है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह पहला अवसर है जब गर्मी इतने कम दिन रहेगी । कमाल यह है कि इस सीजन मे औसतन तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आयी है और नयी टिहरी में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस था। आलम ये है कि जाड़ों में जहां बारिश सिरे से नदारद रही, वहीं गर्मियों में बारिश के साथ ही बादल फटने की घटनाएं भी समय से पहले हो रही हैं। वैज्ञानिक कहते है कि पहाड़ के मौसम में ऐसा बदलाव दशकों बाद देखने को मिल रहा है।

By anita

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