मल्हार राव होलकर होलकर राजवंश की स्थापना करने वाले मराठा शासक थे। उनका निधन 20 मई 1766 के दिन हुआ था। उनका शासन मालावा से लेकर पंजाब तक चलता था और आज वह लाखों लोगों के प्रिय हैं। मध्य भारत के मालवा इलाके में मल्हार राव पहले मराठा सूबेदार थे। वह चरवाहों के परिवार में पैदा हुए थे और शासक बनने के बाद उन्होंने पंजाब तक मराठा साम्राज्य का विस्तार किया था। कहा जाता है साल 1721 में वह पेशवा की सेवा में शामिल हुए थे और देखते ही देखते वह सूबेदार बन गए। मल्हार राव होलकर अपने साहस और पराक्रम के चलते पेशवा के करीबी हुए और सफलता की तरफ बढ़ते चले गये।

उन्होंने साल 1818 तक मराठा महासंघ के एक स्वतंत्र सदस्य के रूप में मध्य भारत में इंदौर पर शासन किया और उनके मरणोपरांत उनकी बहू अहिल्याबाई होलकर ने 1767 से 1795 के बीच शासन की बागडोर संभाली। आप सभी को बता दें कि वह साल 1736 में दिल्ली पर मराठों की महत्वपूर्ण जीत में प्रमुख कमांडर के तौर पर शामिल रहे थे। कहा जाता है इतिहास की कई लड़ाईयां में अपना पराक्रम दिखाने वाले मराठा सरदार मल्हार राव होलकर के नाम पानीपत के तीसरे युद्ध में लड़ाई छोड़कर भाग गए थे।

लेकिन आज भी बहुत से इतिहासकार है जो इस बात को नहीं मानते। कई इतिहासकारों का कहना है मराठा सरदार मल्हार राव होलकर ने इस लड़ाई में भी अहमद शाह अब्दाली की सेना से जमकर लोहा लिया था, लेकिन जब विश्वास राव पेशवा की युद्ध में मौत हो गई और मराठों की हार निश्चित लगने लगी तो मराठों के सेनापति सदाशिव राव भाऊ ने मराठा सरदार मल्हार राव होलकर को बुलाया और उनसे आग्रह किया कि वो उनकी पत्नी पार्वतीबाई को सुरक्षित जगह ले जाएं। यह सुनकर मराठा सरदार मल्हार राव होलकर पार्वती बाई को वहां से लेकर चले गये। इस घटना के बाद कई लोग यह कहत हैं मल्हार राव युद्ध से भाग गए थे।

By anita

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