वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोविड-19 महामारी से लड़ने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और दवाइयों पर सभी तरह के करों और सीमा शुल्क में छूट की मांग का जवाब दिया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि इस तरह के सामानों को पहले ही सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से छूट दी जा चुकी है। इसके साथ ही देश में मुफ्त वितरण के लिये भारतीय रेड क्रास द्वारा आयात की जाने वाली कोविड राहत सामग्री को एकीकृत जीएसटी से भी छूट दी गई है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोविड-19 महामारी से लड़ने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और दवाइयों पर सभी तरह के करों और सीमा शुल्क में छूट की मांग का जवाब दिया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि इस तरह के सामानों को पहले ही सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से छूट दी जा चुकी है। इसके साथ ही देश में मुफ्त वितरण के लिये भारतीय रेड क्रास द्वारा आयात की जाने वाली कोविड राहत सामग्री को एकीकृत जीएसटी से भी छूट दी गई है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोविड-19 महामारी से लड़ने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और दवाइयों पर सभी तरह के करों और सीमा शुल्क में छूट की मांग का जवाब दिया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि इस तरह के सामानों को पहले ही सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से छूट दी जा चुकी है। इसके साथ ही देश में मुफ्त वितरण के लिये भारतीय रेड क्रास द्वारा आयात की जाने वाली कोविड राहत सामग्री को एकीकृत जीएसटी से भी छूट दी गई है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोविड-19 महामारी से लड़ने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और दवाइयों पर सभी तरह के करों और सीमा शुल्क में छूट की मांग का जवाब दिया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि इस तरह के सामानों को पहले ही सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से छूट दी जा चुकी है। इसके साथ ही देश में मुफ्त वितरण के लिये भारतीय रेड क्रास द्वारा आयात की जाने वाली कोविड राहत सामग्री को एकीकृत जीएसटी से भी छूट दी गई है। 

इसके अलावा किसी भी कंपनी, राज्य सरकार, राहत एजेंसी अथवा स्वतंत्र निकाय के द्वारा राज्य सरकार से प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर देश में मुफ्त वितरण के लिए बिना लागत आयात की जाने वाली कोविड सामग्री पर भी आईजीएसटी से छूट दी जा चुकी है। सीतारमण ने कहा, इस प्रकार के सामन की देश में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने इस प्रकार की सामग्री के वाणिज्यिक तौर पर आयात किए जाने पर भी मूल सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से पूरी तरह छूट दी है। 

सरकार ने रेमडेसिविर टीका और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री (एपीआई), नैदानिक किट, चिकित्सा श्रेणी की आक्सीजन, आक्सीजन थेरेपी से जुड़ी उपकरण जैसे कि आक्सीजन कंसंट्रेटर्स, क्रायोजेनिक परिवहन टैंक आदि और कोविड टीकों सहित कोविड-19 से जुड़ी राहत सामग्री के आयात को पहले ही सीमा शुल्क से छूट दे दी है। सरकार ने तीन मई से देश में अनुदान के रूप में निशुल्क वितरण के लिए प्राप्त होने वाली कोविड राहत सामग्री को आईजीएसटी से भी छूट दे दी है। इस कदम से देश में पहुंचने वाली इस प्रकार की राहत सामग्री को सीमा शुल्क से जल्द मंजूरी दिलाने में मदद मिली है।

जीएसटी हटाने से महंगी हो जाएगी दवा
वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 की दवाओं, टीका और आक्सीजन कंसंट्रेटर्स की घरेलू आपूर्ति और वाणिज्यिक आयात पर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) हटाने से ऐसी दवाएं और सामान खरीदारों के लिए महंगे हो जाएंगे। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी हटने पर इनके विनिर्माताओं उत्पादन में प्रयोग किए गए कच्चे-मध्यवर्ती माल व सामग्री पर चुकाए गए कर के लिए इनपुट-टैक्स-क्रेडिट का दावा नहीं कर सकेंगे। वर्तमान में टीके की घरेलू आपूर्ति और वाणिज्यिक आयात करने पर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है वहीं कोविड दवाओं और आक्सीजन कंसंट्रेटर्स पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू है।

उपभोक्ताओं को होगा नुकसान
सीतारमण ने इन सामानों पर जीएसटी से छूट दिए जाने की मांग को लेकर ट्वीट में जवाब देते हुए कहा, यदि टीके पर पूरे पांच प्रतिशत की छूट दे दी जाती है तो टीका विनिर्माताओं को कच्चे माल पर दिये गये कर की कटौती का लाभ नहीं मिलेगा और वह पूरी लागत को ग्राहकों, नागरिकों से वसूलेंगे। पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगने से विनिर्माताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ मिलता है और यदि आईटीसी अधिक होता है तो वह रिफंड का दावा कर सकते हैं। इसलिए टीका विनिर्माताओं को जीएसटी से छूट दिए जाने का उपभोक्ताओं को नुकसान होगा।

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