धरती की ओर बढ़ रहे चीनी रॉकेट के लिए अगले कुछ घंटे काफी अहम हैं। चीन के लॉन्ग मार्च 5बी हैवी-लिफ्ट वाहक रॉकेट के प्रशांत महासागर में गिरने की संभावना है। चीन का एक 21 टन वजनी विशालकाय रॉकेट अंतरिक्ष में अनियंत्रित हो गया है और यह अब पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। अमरीकी वायु सेना के नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार यह जानकारी सामने आई है। स्पेस-ट्रैकडॉटओआरजी द्वारा प्रकाशित अनुमान के मुताबिक यह अंतरिक्ष यान का दूसरा चरण नौ मई (रविवार) को लगभग जीएमटी के अनुसार दो बजकर 52 मिनट पर पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने का अनुमान है।

यह प्रशांत महासागर के दक्षिणी भाग में न्यूजीलैंड से ज्यादा दूर नहीं है। इससे पहले यह अनुमान लगाया गया था कि रॉकेट दूसरे चरण में आठ मई को जीएमटी अनुसार एक बजकर 11 मिनट और 19 बजकर 11 मिनट के बीच पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करेगा। रूस की रोस्कोसमोस अंतरिक्ष एजेंसी ने शुक्रवार को कहा था कि लांग मार्च 5 बी हेवी-लिफ्ट लांच वाहन के दूसरे चरण में नौ मई को प्रशांत महासागर में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने की संभावना जताई गई थी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चीनी रॉकेट पृथ्वी पर अगर किसी आबादी वाले इलाके से टकराता है तो भारी तबाही हो सकती है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस रॉकेट का मलबा न्यूयॉर्क, मैड्रिड और पेइचिंग जैसे शहरों में कहीं भी गिर सकता है। रॉकेट को चीन के वेनचांग रॉकेट प्रक्षेपण स्थल से 29 अप्रैल को प्रक्षेपित किया गया था।

चिंता करने की जरूरत नहीं: चीन 
हालांकि चीन के वैज्ञानिकों ने कहा है कि लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पृथ्वी की कक्षा में आते ही इसके अधिकतर हिस्से जल गए होंगे। जो हिस्से बचे होंगे, वो है मेल्टिंग पॉइंट वाले मैटेरियल से बने होंगे लेकिन वो भी किसी वीरान इलाके या फिर महासागर में ही गिरेंगे। धरती का 75 फीसदी हिस्सा पानी से भरा है और बाकी के 25 फीसदी में भी अधिकतर इलाके वीरान पड़े हुए हैं, इसलिए लोगों को इससे नुकसान होने का खतरा बेहद ही कम है।

पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं:
ये पहली बार नहीं है कि कोई नियंत्रण से बाहर रॉकेट धरती पर गिरने जा रहा हो, लेकिन ये सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है। 1990 के बाद से 10 टन से ज्यादा वजन वाला ऐसा कुछ भी पृथ्वी पर नहीं गिरा है। मई 2020 में एक चीनी रॉकेट धरती पर गिरा था। इसके अधिकतर मलबे अटलांटिक महासागर में गिरे थे। आइवरी कोस्ट पर भी इसका कुछ हिस्सा गिरा था। अगर कुछ मिनट भी इधर-उधर होता तो ये न्यूयॉर्क में तबाही मचा सकता था।

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