रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, आईएएस और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक (डीजीएएफएमएस) सर्जन वाइस एडमिरल रजत दत्ता, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम, पीएचएस, ने देश के आह्वान का जवाब देने के लिए आगे आने वाले सेना के पूर्व डॉक्टरों को संबोधित किया है। सेना के पूर्व डॉक्टर अब भारत के सभी नागरिकों के लिए “ई-संजीवनी ओपीडी पर सेना के पूर्व डॉक्टरों द्वारा ऑनलाइन परामर्श सेवा” के लिए उपलब्ध होंगे।

ई-संजीवनी ओपीडी भारत सरकार का प्रमुख टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म है जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक), मोहाली, भारत सरकार के तत्वावधान में विकसित किया गया है और यह बहुत अच्छी तरह से काम कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म किसी भी भारतीय नागरिक को मुफ्त परामर्श प्रदान करता है। हालांकि, कोविड मामलों में वृद्धि के साथ, डॉक्टरों की मांग बढ़ रही है, लेकिन, डॉक्टरों के कोविड वॉर्ड की ड्यूटी से हट जाने के कारण डॉक्टरों की कमी हो गई है। ऐसी स्थिति में सेना के पूर्व डॉक्टर मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं।

मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ की चिकित्सा शाखा सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों के लिए टेलीमेडिसिन सेवा प्रदान करता है। चिकित्सा शाखा ने देश के सामान्य नागरिक रोगियों के लिए इस पूर्व-रक्षा ओपीडी को शुरू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना केंद्र के साथ समन्वय किया है। आईडीएस मेडिकल के उपाध्यक्ष ने सेवानिवृत्त एएफएमएस डॉक्टरों की सभी सेवानिवृत्त बिरादरी से इस मंच से जुड़ने और संकट के इस समय में भारत के नागरिकों को बहुमूल्य परामर्श प्रदान करने का आग्रह किया है, जब देश कठिन समय से गुजर रहा है।

सेना के सेवानिवृत्त डॉक्टरों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और जल्द ही इसमें सेना के कई सेवानिवृत्त डॉक्टरों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद, एक अलग राष्ट्रव्यापी सेना के पूर्व डॉक्टरों की ओपीडी की परिकल्पना की गई है। उनका विशाल अनुभव और विशेषज्ञता से देश के सामान्य नागरिक रोगियों को अपने घरों पर परामर्श प्राप्त करने और संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

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