कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार अपने-अपने स्तर पर कर्फ्यू और लॉकडाउन लगा रही हैं। ऐसे में आम जनता को किसी तरह की समस्या न हो इस पर केंद्र सरकार भी अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। खासतौर पर कोविड कर्फ्यू या लॉकडाउन के दौरान जमाखोरों के खिलाफ सरकार सख्त है। इसी के मद्देनजर उपभोक्ता मामलों के विभाग ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के अधिकारियों के साथ एक बैठक की और सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उचित मूल्य पर खाद्य पदार्थों, दवाओं, स्वच्छता उत्पादों और अन्य सेवाओं को लोगों तक आसानी से उपलब्ध कराया जाए।
इसके साथ ही जमाखोरों के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं बरतने पर जोर दिया, जिससे महामारी के चलते लगाए गए कर्फ्यू/ लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाई रखी जा सके।

आवश्यक वस्तुओं के मूल्य पर भी हुई चर्चा

इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुख्य सचिवों के साथ एक बैठक में उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव निधि खरे ने देश भर में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और मूल्य की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें राज्य की विभिन्न मंडियों में आवश्यक वस्तुओं की आमद के साथ मूल्य का विवरण भी साझा किया गया।

इसके अलावा, यह भी चर्चा की गई कि खाद्य पदार्थों, दवाओं, स्वच्छता उत्पादों और आवश्यक सेवाओं सहित आवश्यक आपूर्तियों की कीमत न बढ़े और वे उचित मूल्य पर उपलब्ध रहें। मांग, आपूर्ति में असंतुलन की स्थिति से बचने के क्रम में प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन गतिविधियों के लिए राज्य और जिला स्तर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस के संयुक्त दल बनाए जा सकते हैं। साथ ही हड़बड़ी में आवश्यक वस्तुओं की भारी खरीद की स्थिति से बचने के लिए प्रचार और जागरूकता गतिविधियों का संचालन भी कर सकते हैं।

राज्यों के पास जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार

बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि राज्यों के प्रशासन को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए बेईमान व्यापारियों और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण आदि पर नियंत्रण करने और उसे राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों को सौंपने का अधिकार देती है।

6 महीने तक लिया जा सकता है हिरासत में

कालाबाजारी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के रखरखाव निवारण अधिनियम, 1980 की धारा 3 के तहत, समुदाय को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में बाधा पहुंचाने से रोकने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को अधिकतम 6 महीने की अवधि के लिए हिरासत में लिया जा सकता है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और कालाबाजारी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के रखरखाव निवारण अधिनियम, 1980 की देखरेख उपभोक्ता मामलों का विभाग करता है। ये दोनों अधिनियम उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उन्हें बेईमान व्यापारियों व जमाखोरों द्वारा शोषण से बचाने के क्रम में लागू किए गए थे।

By anita

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