छत्तीसगढ़ के जंगल में नक्सलियों के हमले में 22 जवानों के शहीद होने के बाद बंधक बनाए गए सीआरपीएफ कमांडो राकेश्वर मन्हास के लिए पांच दिन तक खुद को जिंदा रखने के लिए धैर्य के सिवा कोई विकल्प नहीं था। 

शुक्रवार को अपने घर लौटे 35 वर्षीय कमांडो ने कहा, “मैंने सबसे कठिन परिस्थिति में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और धैर्य बरकरार रखा।” छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में तीन अप्रैल को नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर घातक हमला कर दिया था जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे तथा कई अन्य घायल हो गए थे

इसके बाद नक्सलियों ने मन्हास को बंधक बना लिया था जिसे उन्होंने आठ अप्रैल को मुक्त कर दिया। शहर के बाहरी इलाके में स्थित बरनी गांव में पहुंचने पर मन्हास के परिजन और ग्रामीणों ने खुशी से उनका स्वागत किया। 

उन्होंने कहा कि शत्रु के चंगुल में फंसने के दौरान उनकी मां की प्रार्थना ने उन्हें जीवित रखा। मन्हास ने कहा, “मुझे यकीन नहीं था कि मुझे छोड़ा जाएगा। मैं अपने दूसरे जीवन का श्रेय अपनी मां को देता हूं। उनकी दुआओं ने मुझे नया जीवन दिया क्योंकि अब तक नक्सलियों के चंगुल से कोई जिंदा बचकर नहीं आया है।” 

उनकी मां कुंती देवी ने कहा, “मैंने अपने बेटे की मुक्ति के लिए माता वैष्णो देवी से प्रार्थना की थी। मेरी प्रार्थना सुनी गई और वह सुरक्षित मेरे पास लौट आया। माता की कृपा है कि आज वह जिंदा है।” 

मन्हास के घर लौटने पर उनके परिवार ने राहत की सांस ली। उनकी बेटी राघवी ने अपने पिता को गले लगा लिया। उनकी पत्नी मुन्नी ने कहा कि उनके जीवन का बुरा दौर गुजर गया है। मन्हास को उम्मीद है कि वह जल्दी ही ड्यूटी पर पुनः लौटेंगे। 

By anita

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