राजधानी रांची में कोरोना के कहर के बीच सदर अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को सच का सामना करना पड़ा। इलाज के अभाव में एक मरीज के दम तोड़ने पर उसके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।   मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि बार-बार कहने के बाद भी न कोई डाक्टर आया और न ही कोई नर्स आई। इलाज के अभाव में उनके मरीज ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री जमकर खरी-खोटी सुनाई।

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सदर अस्पताल में पीपीई किट पहनकर कोविड वार्ड मैं भर्ती मरीजों से मुलाकात करने और व्यवस्था की जानकारी लेने पहुंचे थे। इसी दौरान हजारीबाग के एक कोरोना मरीज ने सदर अस्पताल की दहलीज पर ही दम तोड़ दिया। अस्पताल में उसे बेड नहीं मिला था। एंबुलेंस से पहुंचने के बाद डॉक्टर मरीज को भर्ती करने में काफी देर करते रहे। इससे मरीज की मौके पर ही मौत हो गई। इसी दौरान निरीक्षण को मंत्री पहुंचे और उन्हें देखकर मरीज के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

परिजनों ने कहा कि हजारीबाग से इलाज के लिए सदर अस्पताल आए थे लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोरोना को लेकर व्यवस्था नहीं किए जाने की वजह से दम तोड़ दिया। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि सदर अस्पताल के ना तो नर्स और ना ही डॉक्टर हमारे मरीज को देख रहे थे। अस्पताल कर्मियों की लापरवाही से मौत हुई है।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही थी


वहीं मंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए सदर अस्पताल पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया। बीते कई दिनों से अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही थी। इसकी वजह से लोगों की जान जा रही है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि सभी प्रकार की खामियों को तत्काल दूर किया जाय। मरीजों को हर सुविधा मुहैया कराई जाय। स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना सक्रमित मरीजों से भी मुलाकात की। उनकी परेशानियों को जाना और शीघ्र इन्हें दूर करने का भरोसा दिलाया।

By anita

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