भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच कई देश भारत की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। तो वहीं कोरोना वायरस को लेकर सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में कोविड से संबंधित अलग-अलग याचिकाएं डाली गई हैं। इसी सिलसिले में 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है, जो दावा करती है कि टीकाकरण अभियान में 32 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।

कोरोना टीकाकरण में घोटाला वाली याचिका वकील दीपक आनंद मसीह की ओर से दाखिल की गई है। इस याचिका में कोरोना टीकाकरण के घोटाले के साथ-साथ कोरोना से निपटने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि कोरोना का टीका बनाने की लागत पश्चिमी देशों में 150-200 रुपये से ज्यादा नही है। भारत में कोराना टीकाकरण की लागल ज्यादा है।

खबरों के मुताबिक, अभी 80 करोड़ लोगों को टीके की खुराक लगनी है। ऐसे में टीके की कीमत का हिसाब लगाया जाए तो 32 हजार करोड़ रुपये का घोटाला सामने आता है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नेशनल साइंटिफिक फोर्स तो बना दी लेकिन फरवरी-मार्च में उसकी एक भी बैठक नहीं हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव जारी थे।

याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया कि देश में लॉकडाउन लगाकर भी देख लिया लेकिन इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ। याचिका में कहा गया कि समस्या संसाधनों से ज्यादा सरकारी नीतियों की रही। वकील दीपक आनंद मसीह ने कोर्ट से अपील की कि सरकार को सही नीतियां बनाकर उन पर अमल करने का आदेश दिया जाए।

By anita

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed