अचानक से बढ़े कोरोना मामलों के चलते देश में कुछ जगह ऑक्सीजन की किल्लत हो गयी थी। इससे निपटने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। इस क्रम में सरकार के सहयोग से इस्पाy त संयंत्रों ने ऑक्सीजन के उत्पादन में दोगुना वृद्धि की है।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों ने 25 अप्रैल, 2021 को देशभर में विभिन्न राज्यों को 3,131.84 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की आपूर्ति की है। वहीं 24 अप्रैल, 2021 को 2,894 मीट्रिक टन एलएमओ की आपूर्ति की गई थी। एक हफ्ते पहले तक औसतन 1,500/1,700 मीट्रिक टन प्रति दिन की ही आपूर्ति संभव हो पाती थी। रविवार को एलएमओ का उत्पादन 3,468.60 मीट्रिक टन रहा, जो अब तक एक दिन में सर्वाधिक है।

इस्पात संयंत्र कई तरह की पहल करके एलएमओ की आपूर्ति को बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। इसके लिए संयंत्रों में नाइट्रोजन एवं आर्गन के उत्पादन में कमी की गई और अधिकांश संयंत्रों में केवल एलएमओ का उत्पादन ही किया गया।

सुरक्षा भंडारण को किया गया कम

आम तौर पर इस्पात संयंत्रों को अपने भंडारण टैंक में एलएमओ के 3.5 दिनों के लिए सुरक्षा भंडार रखने की जरूरत होती है, जो वाष्पीकृत होता है। इसका इस्तेमाल ऑक्सीजन संयंत्रों में कुछ समस्याएं उत्पन्न होने पर किया जाता है। एलएमओ आपूर्ति में महत्वपूर्ण वृद्धि के चलते सुरक्षा भंडार को पहले के 3.5 दिनों से घटाकर अब 0.5 दिन कर दिया गया है।

परिवहन को भी तेज किया जा रहा है

वहीं एलएमओ के परिवहन को तेज करने के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा कई निर्देश जारी किए गए। निर्देशों में ऑक्सीजन भेजने के लिए निश्चित संख्या में नाइट्रोजन और आर्गन टैंकरों को परिवर्तित कर ऑक्सीजन टैंकर बनाने के लिए कहा गया है। आज की तिथि में, 8,345 मीट्रिक टन की क्षमता के साथ 765 नाइट्रोजन टैंकर हैं और 7,642 मीट्रिक टन की क्षमता के साथ 434 आर्गन टैंकर हैं। ऑक्सीजन ले जाने के लिए उनके हिस्से को परिवर्तित करने की अनुमति पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा दी गई है। यह कदम राज्यों को एलएमओ के परिवहन में एक बड़ी बाधा को दूर करेगा। आज की तिथि में, एलएमओ के लिए कुल 15,900 मीट्रिक टन की क्षमता के साथ 1,172 टैंकर उपलब्ध हैं।

क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने के लिए संयंत्रों को दिए गए निर्देश

आपको बता दें, भिलाई इस्पात संयंत्र अपने तरल ऑक्सीजन उत्पादन में 15 मीट्रिक टन तक की बढ़ोतरी के तैयारी के लिए कुछ समय के लिए बंद हो रहा है। यह बंद एलएमओ आपूर्ति के रास्ते में नहीं आएगा। इसी तरह के निर्देश अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व वाले इस्पात संयंत्रों को दिए गए हैं, जिससे वे अपनी क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं तलाश सकें।

By anita

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