मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर से कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया है। मलिक पहले भी कई बार किसान आंदोलन पर खुलकर अपना समर्थन जताते रहे हैं। हरियाणा के निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान को लिखे लेटर में सत्यपाल मलिक ने बताया है कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बताने की कोशिश की है कि वे गलत राह पर हैं और किसानों पर दबाव डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। 

किसान आंदोलन पर बीजेपी-जेजेपी की हरियाणा सरकार से अपना समर्थन वापस ले चुके सांगवान ने इस मुद्दे पर सत्यपाल मलिक को सबसे पहले लेटर लिखा था। इसके बाद लेटर का जवाब देते हुए मलिक ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री से कहा है कि दिल्ली से किसानों को खाली हाथ नहीं भेजा जाना चाहिए। राज्यपाल मलिक ने लेटर में कहा, ”किसान आंदोलन के मुद्दे पर मैंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृह मंत्री से मुलाकात की और सुझाव दिया कि किसानों के साथ न्याय करते हुए उनकी जेनुइन मांगों को मान लेना चाहिए। मैंने बैठक में यह भी साफ कर दिया कि किसानों की आवाज दबेगी नहीं। केंद्र को उनकी मांगों को मानना चाहिए। यह भविष्य में भी जारी रहेगा। मुझसे जो भी संभव हो सकेगा, वह करूंगा।”

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, मलिक ने लेटर में आगे लिखा, ”मैं आपको और आपकी खाप को आश्वासन देता हूं कि मैं आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा। मैं मई के पहले हफ्ते में दिल्ली आ रहा हूं और किसान नेताओं के साथ बैठक करके उनके हक में हल निकालने की कोशिश करूंगा।” उन्होंने कहा, ”मुझे आपका लेटर मिला था, जिसमें आपने किसान आंदोलन और कृषि कानूनों के बारे में लिखा है। देश के किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से यह लड़ाई लड़ी है और 300 लोगों की जान भी गंवाई है। यह चिंता की बात है कि केंद्र सरकार ने एक बार भी इस बारे में खेद व्यक्त नहीं किया है।”

वहीं, पिछले महीने किसान आंदोलन पर सत्यपाल मलिक ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार को ऐसा लगता है कि मैं उनका नुकसान कर रहा हूं, तो मैं गर्वनर पर तुरंत छोड़ दूंगा। राज्यपाल के पद से हटने के बाद मैं अपनी बात खुलकर रखूंगा। सत्यपाल मलिक ने कहा था कि सरकार को किसानों से तुरंत बात करना चाहिए, इससे सरकार को भी फायदा होगा और पार्टी को भी लाभ होगा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि किसान आदोलन जितना भी लम्बा चलेगा, देश का उतना ही नुकसान होगा। साथ ही कड़े शब्दों में नेताओं को घेरते को उन्होंने कहा कि यहां एक कुतिया मर जाती है तो नेताओं का शोकसंदेश आ जाता है। लेकिन आंदोलन करते-करते हमारे 250 से ज्यादा किसान मर गए, लेकिन किसी के मुंह से एक शब्द तक नहीं फूटा। यह सरासर ह्रदयहीनता है। 

By anita

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