महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) चीफ राज ठाकरे महामारी के दौर में भी प्रवासी विरोधी अपने अजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। मनसे प्रमुख ने अब महाराष्ट्र में कोरोना केसों में इजाफे के लिए भी प्रवासियों को जिम्मेदार बता डाला है। ठाकरे ने कहा, ”बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से आ रहे हैं, जिनकी जांच नहीं हो रही है। कोविड-19 केस इन लोगों की वजह से बढ़ रहे हैं।”

पहले भी उत्तर भारतीयों के खिलाफ भड़काऊ बयान देते रहे राज ठाकरे ने कहा, ”प्रवासियों के आने और जाने पर कोई नियंत्रण नहीं है और इन लोगों की वजह से स्थानीय मराठियों को लॉकडाउन का सामना करना पड़ेगा और घर में बैठना पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि पिछले लॉकडाउन के दौरान जब प्रवासी बड़ी संख्या में अपने प्रदेशों को चले गए थे तो उन्होंने सलाह दी थी कि जब वे लौटेंगे तो उनके रजिस्ट्रेशन और जांच की आवश्यकता है। ठाकरे ने कहा, ”मेरी दोनों सलाह को नजरअंदाज कर दिया गया। आज कोरोना है, कल कोई दूसरा वायरस होगा। यह चेन थमने वाला नहीं है।”

2007 से ही ठाकरे प्रवासियों के खिलाफ इस तरह के बयान देते रहे हैं। वह अक्सर उन पर मराठियों की नौकरी छीनने और राज्य की दूसरी समस्याओं के लिए जिम्मेदार बताते रहे हैं। 2009 विधानसभा चुनाव में उन्हें इसका फायदा भी हुआ लेकिन इसके बाद 2014 और 2019 के चुनाव में उनकी पार्टी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। 

राज ठाकरे के ताजा बयानबाजी पर मुंबई कांग्रेस के पूर्व प्रमुख संजय निरूपम ने कहा कि राज ठाकरे को इस तरह की संकुचित राजनीति से बाज आना चाहिए। निरूपम ने कहा, ”यह महमारी का समय है, राज ठाकरे को स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए और इस तरह की सस्ती नौटंकी में शामिल ना हों।”

राज ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उन्होंने क्या सलाह दी है। उन्होंने उद्धव ठाकरे से कहा है कि रिटेल दुकानों को कम से कम सप्ताह में दो दिन खुलने की इजाजत दी जाए। ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जाए तो कोरोना मरीजों को बेड देने से इनकार कर रहे हैं। साथ ही लोगों को बिजली बिलों में राहत दी जाए। राज ठाकरे ने 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा टालने और इन्हें अगले क्लास में प्रमोट करने की मांग की।

By anita

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