दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मेडिकल कारणों से एक महिला को उसके 24 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है। मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रूण कई विकृतियों से ग्रस्त है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गर्भपात के दौरान महिला की जान को भी खतरा हो सकता है क्योंकि वह दिल की बीमारी से पीड़ित है और उसे खून को पतला करने की दवाएं दी जा रही हैं।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद महिला को डॉक्टरों की निगरानी में गर्भपात कराने की इजाजत दे दी। इससे पहले उन्होंने महिला के पति से भी बात करके यह जानने का प्रयास किया कि क्या वह गर्भपात के दौरान के जोखिम को समझते हैं। महिला ने मार्च के अंतिम सप्ताह में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी।

याचिका में कहा गया था कि मेडिकल जांच में भ्रूण के फेशियल हेम्रेज और हाइड्रोसीफेलस से ग्रस्त होने का दावा किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की एक मेडिकल बोर्ड गठित कर महिला की जांच करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

मेडिल बोर्ड ने कोर्ट में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि गर्भपात की प्रक्रिया में महिला को खतरा हो सकता है क्योंकि वह हृदयरोगी है, लेकिन भ्रूण के अनेक विकृतियों से ग्रस्त होने के कारण गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिए।

By anita

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