कुंभ मेले में 500 से ज्यादा साधुओं ने नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा ली है। सोमवार को गंगा नदी के तट पर महाकुंभ में 500 साधुओं ने नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा ली। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की ओर से श्री दुखहरण हनुमान मंदिर में अखाड़ा धर्म ध्वजा के नीचे दीक्षा दी गई। दीक्षा के इस पूरे कार्यक्रम को जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कराई। नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा लेने के बाद सभी 500 साधुओं ने गंगा नदी में स्नान किया। जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संयोजक महंत गिरी महाराज ने बताया कि जूना अखाड़ा का मुख्य आकर्षण नागा संन्यासियों को दीक्षा का कार्यक्रम रहता है।

जूना अखाड़ा के श्री महंत मोहन भारती ने कहा, ‘नागा संन्यासियों की दीक्षा का यह आयोजन महाकुंभ में ही किया जाता है।’ इसके अलावा दूसरे सबसे अखाड़े श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा ने भी कुछ साधुओं को बर्फानी नागा संन्यासी की पहचान देने का ऐलान किया है। निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने कहा कि फिलहाल देश भर में निरंजनी अखाड़ा से 2 लाख से ज्यादा नागा साधु जुड़े हुए हैं। आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने कहा, ‘सनातन धर्म और निरंजनी अखाड़ा के प्रचार के लिए हमने साधुओं को नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा देने का फैसला लिया है।’

कैलाशानंद गिरी ने कहा कि हमने आने वाले दिनों में हजारों साधुओं को नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा लेने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि यह एक धार्मिक प्रक्रिया है और हर साधु नागा संन्यासी नहीं होता। यह एक बेहद कठिन प्रक्रिया होती है और हर साधु को नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा नहीं दी जाती। अखाड़ाओं की स्थापना के दौर से ही नागा संन्यासियों को दीक्षा देने की परंपरा रही है। खासतौर पर महाकुंभ के दौरान नागा संन्यासियों को दीक्षा देने का कार्यक्रम हमेशा से मुख्य आकर्षण रहा है। नागा संन्यासियों को दीक्षा देने की प्रक्रिया को देखने के लिए भी लोग जुटते हैं।

By anita

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