भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने हाहाकार मचा दिया है। कोरोना वायरस के रोजाना मामलों में अप्रत्याशित इजाफों ने एक बार फिर से लोगों को डरा दिया है। देशभर कोरोना वायरस के एक्टिव मरीजों की संख्या अब 4 लाख के पार पहुंच गई है। इतना ही नहीं सिर्फ 5 दिनों में ही एक्टिव मरीज़ों की संख्या 3 लाख से बढ़कर 4 लाख हो गई। इससे पहले सितंबर में 6 दिनों में एक लाख एक्टिव केसों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई थी। इस तरह से देश में जब से महामारी की शुरुआत हुई है, तब से यह एक बड़ा रिकॉर्ड है जो सबसे तेज एक लाख का आंकड़ा पार हुआ है। 

इस बीच गुरुवार को देश में 59177 नए केस सामने आए। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो देश में पिछले 159 दिनों में यह कोरोना के मामलों में सबसे बड़ी संख्या है। कोरोना से महाराष्ट्र का सबसे बुरा हाल है। महाराष्ट्र में करीब 36 हजार नए मामले सामने आए, जो एक दिन में सबसे अधिक है। गुरुवार को कोरोना से 255 लोगों की मौत हुई और यह लगातार तीन दिनों से 250 का आंकड़ा पार कर रहा है। भारत में इससे पहले एक्टिव मरीजों की संख्या में सबसे तेज बढ़त पिछले साल सितंबर में दर्ज की गई थी। पिछले साल मध्य सितंबर में एक्टिव मरीजों की संख्या 9 से 10 लाख महज 6 दिनों में ही पहुंच गई थी। देश में कोरोना वायरस के एक्टिव मरीजों की संख्या सिर्फ 2 दिनों में ही 52 हज़ार के पार पहुंच गई है।

देश एक बार फिर संक्रमण के रोजाना एक लाख आंकड़ों वाली स्थिति में पहुंच सकता है। देश में गुरुवार को चौबीस घंटों के दौरान कोरोना के 53 हजार नए मामले सामने आए। एक दिन पहले के मुकाबले यह सात हजार मामलों की वृद्धि है। इस तेजी ने देश को पिछले साल सितंबर की स्थिति में पहुंचा दिया है जब पहली लहर चरम पर थी। तेजी से बढ़ रही जांच पॉजिटिविटी दर ने भी विशेषज्ञों को चिंता की स्थिति में पहुंचा दिया है जो पिछले साल इन्हीं दिनों तीन से पांच प्रतिशत के बीच थी।

तेजी से बढ़ रही पॉजिटिविटी दर से चिंता 
भारत में तेजी से बढ़ रहे जांच पॉजिटिविटी दर ने चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 24 मार्च तक रोजाना जांच पॉजिटिविटी दर 4.6 प्रतिशत है। इससे पहले 21 मार्च को यह दर 3.7 प्रतिशत के आसपास बनी हुई थी जबकि ठीक महीनाभर पहले दर 1.87 प्रतिशत ही थी। यानी भारत में इस वक्त जितने नमूनों की कोविड-19 जांच हो रही है, उनमें लगभग 4.6% नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हो रही है। महामारी की शुरूआत से देश की ओवरऑल पॉजिटिविटी दर 4.9 प्रतिशत बनी हुई है। 

महाराष्ट्र में 23% है ये दर 
राज्यवार रोजाना जांच पॉजिटिविटी दर की स्थिति देखें तो पाएंगे कि कुछ राज्यों में संक्रमण के हालात भयानक हैं।  24 मार्च को महाराष्ट्र में रोजाना जांच पॉजिटिविटी दर 23 प्रतिशत रही, जबकि पंजाब में 5.6%, छत्तीसगढ़ 4.8%, केरल 3.4% और कर्नाटक में 2%। 

दो सप्ताह में 8 फीसदी संक्रमण बढ़ा 
पिछले दो सप्ताह के दौरान देश में संक्रमण के नए मामलों में 7.7% की वृद्धि दर्ज हुई। बीते सप्ताह हर दिन देश में औसतन 42,162 नए केस सामने आए। जबकि इससे एक सप्ताह पहले हर दिन देश में औसतन 23,137 नए मामले दर्ज हो रहे थे।  यानी एक सप्ताह पहले के मुकाबले बीते सप्ताह हर दिन लगभग 7.7 प्रतिशत ज्यादा नए मामले दर्ज हुए।  

दस दिन जल्दी 40 हजार के पार हुए केस
देश में रोजाना संक्रमण के नए मामले 20 हजार से 42 हजार तक पहुंचने में मात्र 11 दिन लगे। जबकि कोरोना की पहली लहर में यह आंकड़ा पार करने में 21 दिन लगे थे। तब 3 जुलाई के आसपास हर दिन 20 हजार नए मामले आ रहे थे जो 24 जुलाई तक पहुंचने के बाद 42 हजार के पार हुए। 

क्षमता से कम जांचें हो रहीं 
बीते 15 फरवरी के बाद से संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा लेकिन इससे निपटने के लिए नमूनों की कोविड-19 जांच कराने जैसे जरूरी कदम उठाने में सरकार ने गंभीरता नहीं दिखायी। आईसीएमआर के आंकड़ों को देखें तो पाएंगे कि 20 फरवरी से अगले 27 दिन तक देश में हर दिन सात लाख से लेकर नौ लाख से कुछ अधिक ही जांचें हुई हैं। 28वें दिन यह आंकड़ा दस लाख पहुंचा, उसके बाद से रोजाना जांचों में कुछ वृद्धि जरूर हुई लेकिन यह सतत नहीं है। ज्यादा जांचें व रेंडम जांचें करने से उन मरीजों का पता लगाया जा सकता है, जिनके शरीर में कोरोना के कोई लक्षण नजर नहीं आते और वे अनजाने में ही दूसरों को संक्रमण फैलाते रहते हैं। 

By anita

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