दुनियाभर में हर साल 24 मार्च को ट्यूबरक्लॉसिस डे मनाया जाता है। यानी विश्व टीबी दिवस (World TB Day)। इस मौके पर जानते हमारे देश में टीबी के बढ़ते मरीजों, इसकी चुनौतियों और इलाज से जुड़ी बातों के बारे में…

सितंबर के महीने में पिछले साल प्रकाशित हुई एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, हमारे देश में टीबी के करीब 27 लाख मरीज हैं। हमारे देश में टीबी से मरनेवाले लोगों की संख्या आज भी इतनी अधिक है कि पूरी दुनिया में टीबी कारण होनेवाली मौतों के आंकड़े के आधार पर हमारा देश दूसरे नंबर पर आता है। आइए, इस बीमारी के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाते हैं ताकि इससे बचाव किया जा सके…

शुगर के मरीजों को टीबी का खतरा अधिक

हमारे देश को शुगर के मरीजों की या डायबीटीज की कैपिटल कहा जाता है। क्योंकि पूरी दुनिया में सबसे अधिक शुगर के मरीज हमारे देश में हैं। ऐसे में टीबी के मरीजों की संख्या अधिक होने का खतरा और बढ़ जाता है। क्योंकि सामान्य लोगों की तुलना में डायबीटीज के मरीजों को टीबी की बीमारी होने का खतरा 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

दोबारा टीबी होने की संभावना

अगर टीबी के मरीज को डायबीटीज भी होती है तो इनमें दोबारा टीबी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही इन दोनों बीमारियों से एक साथ जूझ रहे मरीजों में मृत्युदर भी अधिक देखी जाती है।

इलाज में होनेवाली मुश्किल

डायबीटीज होने की वजह से टीबी का इलाज मुश्किल हो जाता है। इस कारण मरीजों की तकलीफ कई गुना बढ़ जाती है। डाबीटीज के कारण मरीजों का इलाज काफी लंबे समय तक चलता है। टीबी होने की वजह से डायबीटिक लोगों में शुगर कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है।

बच्चों में टीबी की बढ़ती समस्या

हमारे देश में बच्चों की एक बड़ी संख्या टीबी की बीमारी का शिकार है। पीडियाट्रिक ट्यूबरक्लॉसिस जो 15 साल से कम उम्र के बच्चों में होती है, इनके केसेज भी पहले की तुलना में काफी अधिक बढ़ गए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में इस वक्त 1 लाख 33 हजार से अधिक केस ऐसे हैं, जिनमें मरीज की उम्र 15 साल से कम है। यह आंकड़ा टीबी के मरीजों की कुल संख्या का 6.17 प्रतिशत है।