आज पूरा देश शहीद-ए-आजम भगतसिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहादत के 90 साल और देश की आज़ादी के करीब 74 साल बाद भी देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भगत सिंह को आतंकवादी कहा जा रहा है। इस बात पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल तो है, लेकिन देश की बड़ी यूनिवर्सिटीज में शामिल दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताबों में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह और उनके साथियों को आतंकी बताया गया है। 

DU में पढ़ाई जाने वाली इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस नाम की यह किताब में भगत सिंह को आतंकी कहकर संबोधित किया गया है। इसके अलावा सरकारी रिकार्ड में आज तक भगत सिंह को आतंकी क्रान्तिकारी लिखा जा रहा है। अगस्त 2013 में मनमोहन सरकार ने उच्च सदन में भगत सिंह को शहीद माना था, लेकिन इसके बावजूद अब तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया। वहीं, आगरा से प्रकाशित एक पुस्तक में भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद नहीं, बल्कि स्पष्ट शब्दों में आतंकवादी लिखा जा रहा है। 

इस पुस्तक का नाम है माडर्न इंडिया और इसके लेखक हैं केएल खुराना। किताब में साफ़ लिखा हुए है कि, ‘उनमे से बहुतों ने हिंसा का मार्ग अपना लिया और वे आतंकवाद के माध्यम से भारत को स्वतंत्रता दिलाना चाहते थे। पंजाब,महाराष्ट्र और बंगाल आतंकवादियों के गढ़ थे और भूपेन्द्र नाथ दत्त, गणेश सावरकर, सरदार अजित सिंह, लाला हरदयाल, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद इत्यादि आतंकवादियों के प्रमुख सरगना थे।’ बता दें कि सबसे अहम बात तो यह है कि इस पुस्तक का इस्तेमाल बड़ी संख्या में बीए,एमए के विद्यार्थियों के अलावा प्रशासनिक सेवा परीक्षा में बैठने वाले करते हैं। हालांकि, भगत सिंह को किसी से देशभक्त या क्रन्तिकारी होने का प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है, भारत का जनमानस उन्हें बहुत सम्मान की नज़रों से देखता है। लेकिन आने वाली पीढ़ियां अगर इस सच को न समझ सकीं और झूठे तथ्य पढ़कर अगर कुछ गलती कर बैठी तो यह भारत माँ के सच्चे सपूत का बहुत बड़ा तिरस्कार होगा

By anita

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