केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि ट्विटर ने “भ्रामक” और “उत्तेजक” सामग्री के लिए हजारों खातों को अवरुद्ध करने के सरकार के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में एक ब्लॉग पोस्ट प्रकाशित करने का जो फैसला किया जो एक असामान्य कदम है। सरकार का यह बयान और ट्व‍िटर का ब्‍लॉग दोनों के संबंधों को जटिल बनाने की शुरुआत मानी जा सकती है। इन सबके बीच जो नई शुरुआत देखी जा रही है, वो है लोगों का कू पर पलायन। जी हां बीते दो दिन में कई मंत्रियों, मंत्रालयों और सरकारी विभागों ने कू पर अकाउंट बनाया है।

ट्विटर और सरकार के बीच बातचीत

इस मामले को समझने के लिए पहले ट्विटर और सरकार के बीच हुई बातचीत पर प्रकाश डालते हैं। सरकार ने ट्विटर प्रतिनिधियों से कहा कि भारत में, हम स्वतंत्रता को महत्व देने के साथ-साथ हम आलोचना को महत्व देते हैं क्योंकि यह हमारे लोकतंत्र का हिस्सा है। भारत में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए एक मजबूत तंत्र है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत मौलिक अधिकारों के रूप में विस्तार से बताया गया है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में उल्लिखित उचित प्रतिबंधों के अधीन है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों ने भी समय-समय पर इसे बरकरार रखा है।

सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि “टूलकिट” के आसपास के खुलासे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के विरोध को एक योजना के तहत सोशल मीडिया पर नकारात्‍मक ढंग से प्रस्‍तुत करने के अभियान की योजना बनाई गई थी। भारत में वैमनस्य और अशांति पैदा करने के लिए डिज़ाइन किए गए ऐसे अभियानों के निष्पादन के लिए ट्विटर के मंच का दुरुपयोग अस्वीकार्य है।

ट्विटर और कू

इस विवाद के शुरू होते ही कई केंद्रीय मंत्री, मंत्रालय और विभाग “घरेलू ट्विटर” कहे जाने वाले ऐप कू पर अपना अकाउंट बनाने लगे हैं। यह ऐप भारतीय भाषाओं में लघु संदेशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए बनाया गया है। कू करीब 10 महीने पुराना माइक्रोब्लॉगिंग स्टार्ट अप है और यह सभी लोगों को अपनी भाषा में अपने विचार या राय को व्यक्त करने की आजादी देता है। ट्व‍िटर और सरकार के बीच विरोध के चलते भारतीय ऐप कू को लोग तेजी से अपना रहे हैं।

सरल शब्दों में कहें तो कू एक भारतीय ट्विटर है। कू में ट्विटर की तरह सभी खूबियां मौजूद हैं। इस माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट को अप्रमेय रादाकृष्ण और मयंक बिदावतका ने डेवलप किया है। ये अग्रेज़ी के अलावा 8 भाषाओं में मौजूद है। इसे भी ट्विटर की तरह ऐप और वेबसाइट दोनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ऐप ने भारत सरकार के द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर ऐप प्रतिस्पर्धा जीती है।

By anita

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