प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच मंगलवार को वर्चुअल बैठक हुई। इस दौरान संबोधन के दौरान उन्होंने कहा दो दशकों से भारत, अफगानिस्तान के विकास के साझेदारों में से एक रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि काबुल में शहतूत बांध के निर्माण को लेकर भारत और अफगानिस्तान समझौता कर रहे हैं जिससे दोनों देशों की दोस्ती की और मजबूत होगी।

देरी से बैठक में आने पर जताया खेद

प्रधानमंत्री ने कहा “सबसे पहले मैं आप सबसे क्षमा चाहता हूं। मुझे आने में देर हुई। संसद में हमारा संसद सत्र चल रहा है और संसद में कुछ कार्यक्रम के कारण मेरा वहां रहना बहुत जरूरी हो गया। आज हम भारत अफगानिस्तान दोस्ती की लंबी राह में एक और माइल स्टोन रखने जा रहे हैं।”

भारत-अफगानिस्तान सिर्फ जियोग्राफी से ही नहीं बल्कि इतिहास और कल्चर से भी आपस में जुड़े रहे हैं

उन्होंने कहा “भारत और अफगानिस्तान सिर्फ जियोग्राफी से ही नहीं बल्कि हमारे इतिहास और हमारे कल्चर भी आपस में जुड़े रहे हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते रहे हैं। ये सदियों पुराने सम्पर्क हमारी भाषाओं, खानपान, संगीत, साहित्य में झलकते हैं। सभी जानते हैं कि नदियां विश्व की महान सभ्यताओं की वाहक रही है। नदियों ने जीवनदाता बनकर हमारे राष्ट्र हमारे समाज को परिभाषित किया। भारत में हम अपनी गंगा नदी को एक माता का दर्जा देते हैं और उसके कायाकल्प के लिए अपना “नमामि गंगे” कार्यक्रम शुरू किया। नदियों के लिए यह सम्मान भारत और अफगानिस्तान की साझा सांस्कृतिक विरासत है। हमारे यहां ऋग्वेद का नदी स्तुति सूक्त हमारे क्षेत्र में बहने वाली नदियों की प्रशंसा करता है। मौलाना जलालुद्दीन रूमी ने नदियों के शक्तिशाली संबंध में कहा था “”जो नदी तुममे बहती है वह मुझमें भी बहती है।”

दो दशकों से भारत अफगानिस्तान के प्रमुख विकास साझेदारों में से एक

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले लगभग दो दशकों से भारत अफगानिस्तान के प्रमुख विकास साझेदारों में रहा है। अफगानिस्तान ने हमारी विकास परियोजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिसिटी बिल्डिंग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे अनेक सेक्टर में हमारी योजनाएं फैली हैं। एक दशक पहले पूले खुमरी से ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण से काबुल शहर में बिजली की आपूर्ति बेहतर हुई। 218 किलोमीटर लंबे डेलाराम खरंज राजमार्ग ने अफगानिस्तान के लिए कनेक्टिविटी का एक विकल्प पैदा किया। कुछ वर्ष पहले बने मैत्री बांध से हेरात में बिजली और सिंचाई का सिस्टम सदृढ़ हुआ। अफगानिस्तान के संसद का निर्माण भारत और अफगानिस्तान की जनता का डेमोक्रेसी के प्रति लगाव का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा।”

विभिन्न प्रोजेक्ट्स के बूते आपसी साझेदारी और हुई मजबूत

उन्होंने कहा “इन सभी प्रोजेक्ट्स का एक प्रमुख पहलू यह रहा कि इनसे भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती, हमारी अपनी आपसी साझेदारी और मजबूत हुई। यही दोस्ती, यही निकटता कोविड महामारी के खिलाफ भी हमारे बीच दिखती रही है। चाहे दवाईयां और पीपीई किट हो या भारत में बनी वैक्सीन की सप्लाई हमारे लिए अफगानिस्तान की आवश्यकता हमेशा महत्वपूर्ण रही हैं और रहेगी। इसलिए मैं यह कह सकता हूं कि आज हम काबुल में जिस शहतूत बांध के निर्माण में पर समझौता कर रहे हैं उसकी नींव सिर्फ ईंटों और मोर्टार पर नहीं बनेगी बल्कि भारत-अफगान की दोस्ती की ताकत पर टिकी होगी। काबुल शहर भारत के लोगों के दिल-ओ-दिमाग में बसा है।”

शहतूत बांध परियोजना से काबुल शहर के नागरिकों को मिलेगी पेयजल सुविधा

प्रधानमंत्री ने कहा, “कई पीढ़ियां जैसे आपने उल्लेख किया गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की काबुलीवाला कहानी पढ़कर बड़ी हुईं हैं और इसलिए मुझे विशेष खुशी है कि शहतूत बांध परियोजना से काबुल शहर के नागरिकों को पेयजल सुविधा प्रदान होगी। साथ-साथा काबुल नदी बेसिन में एक सिंचाई नेटवर्क का विकास भी होगा। जब मैं संसद भवन के उद्घाटन के लिए दिसंबर 2015 में काबुल आया था तब मैंने हर अफगान पुरुष, महिला और बच्चों की आंखों में भारत के लिए बड़ा प्यार देखा था। अब के अफगानिस्तान में मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं किसी दूसरे के घर में हूं बल्कि मुझे ऐसी अनुभूति हुई थी कि यह अपना ही घर है। ये बदरखसां से निमरोज और हेरात से कंधार तक हर अफगान बहन और भाई को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि भारत आपके साथ खड़ा है।”
अफगानिस्तान की संकल्प की यात्रा के हर कदम पर भारत साथ

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आपके धैर्य, साहस और संकल्प की यात्रा के हर कदम पर भारत आपके साथ रहेगा। कोई भी बाहरी ताकत अफगानिस्तान के विकास को या भारत-अफगानिस्तान की दोस्ती को रोक नहीं सकती। अफगानिस्तान में बढ़ रही हिंसा से हम चिंतित हैं। निर्दोष नागरिकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को कायरतापूर्ण ढंग से निशाना बनाया जा रहा है। हमने हिंसा को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है और हम फौरन एक व्यापक संघर्ष विराम का समर्थन करते हैं। हिंसा शांति का प्रतिकार है और दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते। एक निकट पड़ोसी और मजबूत स्ट्रेटेजिक पार्टनर के रूप में भारत और अफगानिस्तान दोनों ही अपने क्षेत्र को आतंकवाद और उग्रवाद से मुक्त देखना चाहते हैं।”

भारत एक ऐसी शांति प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है जो अफगानिस्तान के नेतृत्व में हो

उन्होंने यह भी कहा कि “भारत एक ऐसी शांति प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है जो अफगानिस्तान के नेतृत्व में हो, स्वामित्व में हो और नियंत्रण में हो। अफगानिस्तान के आवाम में एकजुटता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। मुझे विश्वास है कि एकजुट अफगानिस्तान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सक्षम है। अफगानिस्तान की सफलता में हम भारत की ओर से पूरे क्षेत्र की सफलता देखते हैं। हम एकबार फिर सभी अफगान मित्रों को भारत की दोस्ती का पूरा विश्वास देता हूं। भारत पर रखे आपके विश्वास के लिए मैं हृदय से सभी अफगान के मेरे भाइयों-बहनों का आभार भी व्यक्त करता हूं।”

By anita

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