संसद के बजट सत्र में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में संबोधित किया। यहां पीएम मोदी ने किसान आंदोलन में शामिल बाहरी लोगों को लेकर कहा कि श्रमजीवी और बुद्धिजीवियों के बीच एक नई जमात अब सामने आ रही है जिनका नाम आंदोलनजीवी। ये छात्रों का आंदोलन हो या किसानों का या और कोई हर जगह पहुंच जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि ये आंदोलनजीवी लोगों को गुमराह करने का काम करते हैं।

उन्‍होंने किसानों का समर्थन देने वाले विदेशियों पर भी तंज कसा। उन्‍होंने कहा कि एफडीआई जो फॉरेन डिस्‍ट्रक्टिव आइडियोलॉजी है, से बचने की जरूरत है।  उन्‍होंने ये भी कहा कि कोरोना काल में भी पड़ोसी देश ने सीमा पर तनाव व्‍याप्‍त करने की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इसका हमारे जवानों ने डटकर मुकाबला किया और चीन को करारा जवाब भी दिया। सीमा के सवाल पर सरकार किसी के सामने झुकने वाली नहीं है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई है। ज्यादा से ज्यादा समय जो बात बताई गईं, वो आंदोलन के संबंध में बताई गई। लेकिन किस बात को लेकर आंदोलन है उस पर सब मौन रहे। अगर, बंगाल में राजनीति आड़े में ना आती, तो वहां के लाखों किसानों को लाभ मिलता।  किसी ने भी किसान कानून पर चर्चा नहीं की सब ने कहा कि ये कानून जल्दी लाया गया और बिना चर्चा के लाया गया लेकिन शादी दौरान फूफी भी नाराज हो ही जाते हैं।  मोदी की इस बात पर सदन में ठहाके लगने लगे। 

By anita

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