राफेल और ​​तेजस के बाद भारतीय वायुसेना ने अपने बेड़े में 114 और लड़ाकू विमान शामिल करने की योजना बनाई है। इस काम में 1.3 लाख करोड़ रुपए का खर्च आयेगा। खास बात यह है कि दुनियाभर की कई बड़ी रक्षा कंपनियां इस सौदे पर अपनी रुचि दिखा रही हैं। इनमें अमेरिका, फ्रांस, रूस और स्वीडन की कंपनियां शामिल हैं। इनमें अमेरिकी कंपनी बोइंग अपने एफ-15 स्ट्राइक ईगल को लेकर सबसे ज्यादा गंभीर है​​। ​एयरो इंडिया-2021 के दौरान बोइंग ने हैदराबाद के टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड में एक नई उत्पादन लाइन बनाने की घोषणा की है जहां 737 विमानों के ढांचे तैयार किये जायेंगे​​।​

बोइंग कम्पनी का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल ऑल-वेदर मल्टीरोल स्ट्राइक ​​फाइटर जेट है। अमेरिका ने स्ट्राइक ईगल को इराक, अफगानिस्तान, सीरिया और लीबिया में सैन्य अभियानों के लिए तैनात किया है। तमाम अमेरिकी ऑपरेशनों के दौरान स्ट्राइक फाइटर ने तय किये गये लक्ष्यों पर और हवाई गश्त का मुकाबला करते हुए लड़ाकू हमले किए हैं। इसका इस्तेमाल खुद अमेरिकी वायुसेना करती है और कई देशों को निर्यात भी किया गया है जिनमें इजराइल, सऊदी अरब, साउथ कोरिया, कतर, सिंगापुर की वायुसेनाएं इसका इस्तेमाल कर रही हैं।

2007 में रखा था प्रस्‍ताव

दरअसल 2007 में ही वायुसेना ने अपने बेड़े में 126 मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) की कमी होने की जानकारी देकर रक्षा मंत्रालय के सामने खरीद का प्रस्ताव रखा था। इस पर फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 126 राफेल फाइटर जेट का सौदा किया जा रहा था। बाद में यह प्रक्रिया रद्द करके नए सिरे से सिर्फ 36 राफेल विमानों का सौदा किया गया। हालांकि इनमें से अभी तक 11 विमान भारत आ चुके हैं। सभी 36 विमान 2022 तक भारत को फ्रांस से मिल जायेंगे। इस तरह 126 के बजाय 36 विमानों का सौदा होने से वायुसेना के बेड़े में 90 विमानों की कमी बरकरार रही।

वायु सेना को उम्मीद थी कि वह 36 राफेल के शुरुआती ऑर्डर का इस्तेमाल करके 90 और विमान हासिल कर लेगी लेकिन ऐसा न होते देख अब उसने 114 नए प्रकार के सिंगल इंजन वाले एमएमआरसीए खरीदने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। भारतीय वायुसेना ने निविदा के लिए रुचि पत्र भी जारी कर दिया है जिसके तहत रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) का जवाब फाइटर जेट निर्माण क्षेत्र के कई बड़े खिलाड़ियों ने दिया है। इसमें अमेरिका, फ्रांस, रूस और स्वीडन की कंपनियां शामिल हैं।​ ​अमेरिकी कंपनी बोइंग ​ने ​एयरो इंडिया शो में एफ-15 स्ट्राइक ईगल, एफ-18 सुपर हॉर्नेट और एफ-16 वेरिएंट को एफ-21 के नाम से पेश ​किया है। वायुसेना इस डील के लिए रक्षा मंत्रालय से जल्द ही एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) लेने के लिए प्रस्ताव देने की तैयारी कर रही है।

क्या कहते हैं एयर चीफ मार्शल

एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया का कहना है कि एलसीए तेजस एमके-1ए का सौदा होने के बाद अब वायुसेना ने 114 लड़ाकू विमानों को खरीदने पर अपना ध्यान फोकस कर लिया है। उनका मानना है कि 114 विदेशी जेट्स इसलिए खरीदना जरूरी है क्योंकि ​वायुसेना के लड़ाकू बेड़े ​की भरपाई 83 एलसीए विमानों से नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों लड़ाकू विमानों की अलग-अलग क्षमताएं हैं। लड़ाकू विमानों को लेकर​​ होने वाले समझौते में मेड इन इंडिया और टेक्नॉलजी ट्रांसफर की भी शर्त रहेगी।

हालांकि स्वीडन की कंपनी भी अपने ग्रिपेन लड़ाकू विमान के साथ भारत में संभावना देख रही है। कंपनी का दावा है कि भारतीय वायु सेना के लिए 2007 में रखी गई पेशकश की तुलना में इस बार कहीं अधिक उन्नत फाइटर जेट ​होगा​। दरअसल राफेल की आपूर्ति होने के बाद वायु सेना ने विमान खरीद के मापदंडों को और भी ऊंचा कर दिया है जिसके आधार पर लड़ाकू विमानों का चयन किया जाएगा। भारतीय वायु सेना एकल और डबल इंजन दोनों तरह के फाइटर जेट को टेस्ट करेगी। वायुसेना ऐसे फाइटर जेट्स लेना चाहती है जो अगले चार दशकों (40 साल) तक भारत के हवाई बेड़े की ताकत बने रह सकें। विदेशी कंपनियों को भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करना होगा ताकि आत्म निर्भर भारत की योजना को भी मजबूती मिल सके।

By anita

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