बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की गिनती उन अभिनेत्रियों में होती है, जो सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि अन्य मुद्दों पर भी अपनी बात खुलकर रखती हैं। डिप्रेशन से लेकर वुमन एंपावरमेंट तक, कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर दीपिका अक्सर बात करती हैं। ऐसे में अब दीपिका पादुकोण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ पर अपनी बात रखी है। दीपिका के सोशल मीडिया पोस्ट को फैन्स काफी पसंद कर रहे हैं।

दीपिका पादुकोण ने अपने रिट्वीट में PMO को भी टैग किया है और साथ ही #NariShakti और #MannKiBaat का भी इस्तेमाल किया है। वैसे बात दीपिका के वर्कफ्रंट की करें तो अभिनेत्री ने शकुन बत्रा की फिल्म शुरू कर दी। दीपिका ने फिल्म के बारे में कहा था कि यह एक ऐसी रिलेशनशिप स्टोरी है, जिसे इंडियन सिनेमा में अब तक नहीं देखा गया है। वहीं इसके बाद शाहरुख खान के साथ एक्शन फिल्म पठान और फिर प्रभास के साथ नाग अश्निवी की बहुभाषी फिल्म में दीपिका पादुकोण नजर आएंगी। इसके साथ ही दीपिका की जोड़ी ऋतिक रोशन के साथ फिल्म फाइटर में  देखने को मिलेगी। फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद करेंगे।

महिलाओं के लिए क्या बोले थे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
“मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ दिन पहले आपने देखा होगा, अमेरिका के San Francisco से बैंगलुरू के लिए एक non-stop flight  की कमान भारत की चार women pilots ने संभाली। दस हजार किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा सफ़र तय करके ये flight सवा दो-सौ से अधिक यात्रियों को भारत लेकर आई। आपने इस बार 26 जनवरी की परेड में भी गौर किया होगा, जहां, भारतीय वायुसेना की दो women officers ने नया इतिहास रच दिया है। क्षेत्र कोई भी हो, देश की महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन, अक्सर हम देखते हैं, कि, देश के गाँवों में हो रहे इसी तरह के बदलाव की उतनी चर्चा नहीं हो पाती, इसलिए, जब मैंने एक खबर मध्य प्रदेश के जबलपुर की देखी, तो मुझे लगा कि इसका जिक्र तो मुझे ‘मन की बात’ में जरुर करना चाहिए। ये खबर बहुत प्रेरणा देने वाली है।” 

“जबलपुर के चिचगांव में कुछ आदिवासी महिलाएं एक rice mill में दिहाड़ी पर काम करती थीं। कोरोना वैश्विक महामारी ने जिस तरह दुनिया के हर व्यक्ति को प्रभावित किया, उसी तरह, ये महिलाएं भी प्रभावित हुईं। उनकी rice mill  में काम रुक गया। स्वाभाविक है कि इससे आमदनी की भी दिक्कत आने लगी, लेकिन ये निराश नहीं हुईं, इन्होंने, हार नहीं मानी। इन्होंने तय किया, कि, ये साथ मिलकर अपनी खुद की rice mill शुरू करेंगी।”

“जिस मिल में ये काम करती थीं, वो अपनी मशीन भी बेचना चाहती थी। इनमें से मीना राहंगडाले जी ने सब महिलाओं को जोड़कर ‘स्वयं सहायता समूह’ बनाया, और सबने अपनी बचाई हुई पूंजी से पैसा जुटाया,। जो पैसा कम पड़ा, उसके लिए ‘आजीविका मिशन’ के तहत बैंक से कर्ज ले लिया, और अब देखिये, इन आदिवासी बहनों ने वही rice mill खरीद ली, जिसमें वो कभी काम किया करती थीं। आज वो अपनी खुद की rice mill चला रही हैं। इतने ही दिनों में इस mill ने करीब तीन लाख रूपये का मुनाफ़ा भी कमा लिया है। इस मुनाफे से मीना जी और उनकी साथी, सबसे पहले, बैंक का लोन चुकाने और फिर अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए तैयारी कर रही हैं। कोरोना ने जो परिस्थितियां बनाईं, उससे मुकाबले के लिए देश के कोने-कोने में ऐसे अद्भुत काम हुए हैं।”

By anita

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