युगद्रष्टा महात्मा गांधी की पुण्यतिथि आज, जानिए मोन्या से महात्मा बनने की कहानी |सत्य के आदर्श को आचरण में ढालकर मोन्या से महात्मा हो जाने वाले गांधी विश्व भर में प्रणम्य है। शनिवार को युगद्रष्टा महात्मा गांधी की 73 वीं पुण्यतिथि है। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। सत्य और अहिंसा के आदर्श के साथ कार्य कर उन्होंने देश के स्वाधीनता संग्राम में अपनी भागीदारी दी। महात्मा गांधी व्यवहारिक और कर्मठ व्यक्ति थे। किसी अन्य को कोई मार्ग सुझाने से पूर्व वे स्वयं उस मार्ग पर चलना श्रेयस्कर समझते थे।

महात्मा गांधी अपनी मां से थे प्रभावित, उच्च शिक्षा के लिए गए लंदन

गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1868 को जन्मे महात्मा गांधी के बचपन का नाम मोन्या था। बचपन से ही उनकी माता पुतलीबाई का प्रभाव उन पर पड़ा। उनकी माँ पुतलीबाई एक पारंपरिक हिन्दू महिला थीं जो धार्मिक प्रवृत्ति वाली एवं संयमी थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने घर एवं परिवार के लिए समर्पित कर दिया था। गाँधीजी की माँ के व्यक्तित्व ने उनके व्यक्तित्व को बहुत प्रभावित किया। समर्पण, निष्ठा,प्रार्थना और ईश्वर में आस्था जैसे गुण उन्हें अपनी मां से विरासत में मिले थे। उन्होंने ने राजकोट में प्राथमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे एक साधारण छात्र थे और स्वभाव से अत्यधिक शर्मीले एवं संकोची थे। उन्होंने वर्ष 1891 में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

महात्मा जिसने सत्य के बल पर रंगभेद और गुलामी से लड़ी लड़ाई

सत्य और अहिंसा, इन दो मूल्यों पर महात्मा गांधी की अगाध श्रद्धा थी। स्वतंत्रता एवं शांति की स्थापना ही उनके जीवन का एक मात्र लक्ष्य था। महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता और शांति के लिए शुरू की गई इस लड़ाई ने भारत और दक्षिण अफ्रीका में कई ऐतिहासिक आंदोलनों को एक दिशा प्रदान की। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ाई हो से लेकर असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन इन सभी में ही उन्होंने सत्य और अहिंसा रूपी अस्त्रों का प्रयोग किया।

इस वर्ष हम महात्मा गांधी की 73 वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं, आइये दृष्टि डालते हैं उनसे जुड़े कुछ तथ्यों पर –

• जिस घर में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था वह घर आज कीर्ति मंदिर के नाम से जाना जाता है।

• नई दिल्ली स्थित राजघाट बापू का समाधिस्थल है।

• महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा 8 किलोमीटर लंबी थी और हजारों लोग इस यात्रा में शामिल हुए थे

• महात्मा गांधी को पांच बार नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।

• देश भर में 53 बड़ी सड़कें और दुनिया के प्रमुख देशों में 48 सड़कें महात्मा गांधी के नाम पर हैं।

• मदुरई के गांधी संग्रहालय में बापू के अवशेष सुरक्षित रखे हुए हैं।

• महात्मा गांधी के एक अध्यापक आयरिश थे। इन शिक्षक का प्रभाव गांधी जी पर भी पड़ा। गांधी जी जब अंग्रेजी बोलते थे तो उच्चारण में आयरिश का प्रभाव रहता था

• पत्रों के माध्यम से गांधी जी विश्व के प्रसिद्ध व्यक्ति जैसे टॉलस्टॉय, आइंस्टीन, हिटलर और चार्ली चैपलिन इत्यादि से संवाद करते थे।

अपूर्व क्षमताओं के धनी, मानवता का संदेश देने वाले महात्मा गांधी ऊपर से बेहद साधारण दिखाई पड़ते थे, पर उनके आंदोलनों ने विदेशी ताकतों की जड़ें हिला दी। स्वतंत्रता आंदोलन, अछूतोद्धार, पर्यावरण, अहिंसा, स्वच्छता और स्वदेशी अभियान में महात्मा गांधी के सार्वभौमिक संदेश और उनके कार्य आज भी विश्व का पथ-प्रदर्शन कर रहे हैं।

By anita

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