सांसद मेनका संजय गांधी का बेजुबान जानवरों के प्रति प्रेम और सेवा जग-जाहिर है। अब मेनका गांधी सड़क पर घूमने वाले कुत्ते के अंधे बच्चे को अपनाकर चर्चा में आई हैं। कुत्ते के इस बच्चे का नाम उन्होंने अहिल्या रखा है।

सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को आम आदमी दुत्कार देता है लेकिन मेनका गांधी उसे भी अपना लेती हैं। मेनका ने सड़क पर घूमने वाले कुत्ते के अंधे बच्चे को अपनाकर इसी को साबित किया है। उन्होंने बनारस की सड़कों पर घूमने वाले कुत्ते के बच्चे को अपनाया है। 

मेनका अपने संसदीय क्षेत्र सुलतानपुर के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंची तो उनके पास बनारस के एक कुत्ते के बच्चे को लाया गया।बच्चे की दोनों आंखें नहीं थीं। जन्मजात अंधे होने के कारण बनारस के लोग इसकी देखभाल करने में असमर्थ दिखे। जब इन लोगों को जानकारी हुई कि सांसद मेनका गांधी अपने संसदीय क्षेत्र सुलतानपुर आ रही हैं तो बनारस के लोगों ने सीधे सांसद गांधी से संपर्क किया और कहा कि मैडम मेरे पास एक कुत्ते का बच्चा है। हम लोग उसकी देखभाल करने में असमर्थ है। इस पर उन्होंने अपने शास्त्रीनगर आवास का पता देते हुए उसको लेकर आने को कहा था। 

सोमवार की देर शाम जब मेनका गांधी सुलतानपुर आवास पहुंची और कुत्ते के बच्चे को देखा तो उनसे नहीं रहा गया। उसे उठाकर मेनका गांधी ने अपनी शाल में लपेट लिया। प्यार-दुलार करने लगी। मेनका ने कहा भले अहिल्या की आंखें न हों लेकिन वे इसे दिल्ली में अपने साथ रखेगी और कोई कष्ट नहीं होने देंगी। श्रीमती गांधी ने रात में अहिल्या को अपने पास सुलाया। सांसद के बेजुबान के प्रति इस प्रकार का प्रेम , दुलार व अपनत्व चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सराहना कर रहे हैं।

By anita

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